संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के चंदाना गेट पर स्थित श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह मंदिर कैथल को छोटी काशी के रूप में भी पहचान दिलाता है।
मान्यता है कि इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध के बाद, भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध में मारे गए सैनिकों की आत्मिक शांति के लिए यहां 11 रुद्रों की स्थापना की थी। पांडवों ने भी यहां विधिवत पूजा-अर्चना करवाई थी।
इतना ही नहीं, ऐसा भी कहा जाता है कि अर्जुन ने जब पाशुपत अस्त्र प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी, तब शिव ने इसी स्थान पर प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए थे। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए पूजनीय बन गया।
महर्षि कश्यप से भी जुड़ा है मंदिर का इतिहास ः पुजारी पं. मुनिंद्र मिश्रा बताते हैं कि यह स्थल महर्षि कश्यप की तपस्थली भी रहा है। मान्यता है कि उन्होंने भगवान शिव से वरदान मांगा था कि शिव उनके पुत्र रूप में जन्म लें। भगवान शिव ने गाय माता (सुरभि) के गर्भ से 11 रूपों में अवतार लिया, इसलिए इन्हें सुरभि पुत्र भी कहा जाता है। देशभर में ऐसा कोई अन्य स्थान नहीं है जहां 11 रुद्रों की स्थापना एक साथ की गई हो।
इन रुद्रों के नाम हैं : विलोहित, शास्ता, कपाली, पिंगल, अजपाद, अहिबरुध्न्य, भीम, विरूपाक्ष, चंड, भव और शंभु।
वर्तमान स्वरूप और सुविधाएं ः मंदिर परिसर में ही श्री ग्यारह रुद्री मंदिर स्कूल भी संचालित किया जा रहा है, जहां शहरभर के सैकड़ों बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। बच्चों के लिए एक सुंदर वाटिका भी बनाई गई है जिसमें झूले लगे हैं। मंदिर में एक प्राचीन तालाब भी स्थित है, जहां विशेष अवसरों पर श्रद्धालु स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं।
इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर में श्री भद्रकाली मंदिर, एक भव्य मंच, एक हॉल और आवासीय व्यवस्था के लिए 10 कमरे भी बने हुए हैं, जहां बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
मंदिर कैसे पहुंचे: श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर, चंदाना गेट पर शहर के बीचोबीच स्थित है। रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग एक किलोमीटर है, जबकि बस स्टैंड से यह लगभग चार से पांच किलोमीटर दूर है। बस स्टैंड से चंदाना गेट के लिए ऑटो मिल जाते हैं।
मंदिर की विशेषताएं
मंदिर समिति के प्रधान विनोद मित्तल बताते हैं कि शिव पुराण के अनुसार जो भक्त महाशिवरात्रि पर 11 रुद्रों पर जलाभिषेक करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे हजार गायों के दान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
चार एकड़ क्षेत्र में फैले इस मंदिर परिसर में राम दरबार, माता दुर्गा, वैष्णो माता, राधा-कृष्ण, महाकाली, नवग्रह और राधे मंदिर भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। सावन मास की शिवरात्रि पर कांवड़ यात्रा और कथा प्रवचन का आयोजन भी विशेष आकर्षण होता है।