संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरकेएसडी महाविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग ने मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ संविधान दिवस मनाया। इस मौके पर संविधान से संबंधित हुई प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के दौरान संविधान सभा की चित्र प्रर्दशनी, पुस्तक प्रर्दशनी, पोस्टर मेकिंग, संविधान की प्रस्तावना लेखन, प्रस्तावना की शपथ, एवं ऑनलाइन संभाषण एवं चर्चा परिचर्चा हुई।
प्राचार्य डॉ. सत्यबीर मैहला ने रिबन काटकर प्रतियोगिताओं का शुभारंभ किया। उनके साथ प्राचार्य प्रभारी डॉ. हरिंद्र गुप्ता, विभागाध्यक्ष प्रो.श्रीओम, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. राजबीर पराशर, डॉ. अशोक अत्री, लाइब्रेरियन डॉ. नरेश कुमार, डॉ. विरेंद्र सिंह, डॉ. विनोद मान, डॉ.अनुकृति, डॉ.जगबीर, प्रो. लेखिका, डॉ.रितु, प्रो. वीरेंद्र शर्मा उपस्थित रहे।
पोस्टर मेकिंग एवं चित्र प्रदर्शनी प्रतियोगिता डॉ. विनोद मान, पुस्तक प्रदर्शनी डॉ. विरेंद्र सिंह, प्रस्तावना लेखन की प्रतियोगिता का डॉ. अनुकृति ने कुशल संचालन किया। निर्णायक की भूमिका डॉ. जगबीर, डॉ.रितु, प्रो. विरेंद्र शर्मा एवं प्रो. लेखिका ने निभाई।
सभी अतिथियों ने चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया एवं संविधान निर्माण की जानकारी प्राप्त की। महाविद्यालय के 80 विद्यार्थियों ने इन प्रतियोगिता में भाग लिया। संविधान की सफलता एवं असफलता विषय पर पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. आरके गुप्ता ने अपने विचार रखे। मंच संचालन डॉ. सुरेंद्र सिंह, स्वागत भाषण प्रो.श्रीओम, धध्न्यवाद प्रस्ताव डॉ. अशोक ने किया।
प्रतियोगिताओं के परिणाम ः प्रस्तावना लेखन प्रथम स्नेहा, द्वितीय रितिका, तृतीय मुकेश, चतुर्थ सांत्वना पुरस्कार खूशी, पोस्टर मेकिंग प्रथम जसप्रीत कौर, द्वितीय साहिल चौहान, तृतीय आरती, चतुर्थ सांत्वना पुरस्कार शीतल।
मौलिक कर्तव्यों का पालन करने की दिलवाई शपथ
कलायत। लघु सचिवालय में एसडीएम सत्यवान मान की अध्यक्षता में संविधान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों को एसडीएम ने मौलिक कर्तव्यों और देश का कानून का पालन करने का प्रण लेने की शपथ भी दिलवाई।
इस मौके पर एसडीएम ने कहा कि कहा कि आज बेहद गर्व का दिन है कि 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया गया था। इस संविधान दिवस पर एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प लें।
उन्होंने कहा कि कोई भी देश बिना संविधान के नहीं चल सकता। एसडीएम ने कहा कि यह हमारा संविधान ही है जो अलग-अलग धर्मों व जातियों की भारत की 140 करोड़ की आबादी को एक परिवार की तरह जोड़ता है। संवाद