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अंबाला रोड बाईपास चौक पर चालान काटने की प्रक्रिया से तंग आए दुकानदार

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shop keeper - फोटो : Kaithal
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वीरवार को अंबाला बाईपास पर डेंटर, पेंटर और कारीगरों ने पुलिस की चेकिंग और प्रतिदिन चौक पर काटे जा रहे चालान से परेशान होकर दुकान बंद करके चाबी पुलिस कर्मियों को थमा दी। साथ ही चौक के साइड में एकत्रित हो गए। सूचना पाकर सिविल थाना एचएचओ मौके पर पहुंचे। उन्होंने सभी कारीगरों को समझाकर शांत किया और उनकी समस्या का जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया।
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दुकानदार नरेश, श्रवण, धर्मपाल, नन्हा, सुरजीत मिस्त्री, मोनू सैनी, रिंकू मिस्त्री, पेंटर सोनू, पवन, डेंटर सुरेंद्र, कारपेंटर रामदिया, सोनू, विक्रम पेंटर, मैकेनिक राहुल, प्रवीन, सुमित, प्रहलाद, लालचंद व संगम ने कहा कि वैसे ही कोरोना में काम कम हो गया है। उसके ऊपर प्रतिदिन पुलिस कर्मचारी अंबाला चौक के दोनों और खड़े होकर आने-जाने वालों के चालान करते हैं। कई बार कोई मिस्त्री बाइक ठीक करके टेस्टिंग के लिए भी ले जाता है, तो भी चालान कर दिया जाता है। मिस्त्री के बताने के बावजूद भी कोई रियायत नहीं बरती जाती। उन्होंने कहा कि दोनों ओर पुलिस कर्मी जैसे ही चालान के लिए खड़े होते हैं तो उनकी दुकान पर एक भी ग्राहक नहीं पहुंचता। ग्राहक चालान काटते देखकर वापस ही चला जाता है। यदि ऐसे ही होता रहा तो उनकी दुकानों के किराए 10 हजार से 20 हजार तक हैं, वे कैसे पूरे होंगे। इससे सीधा उनको आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि उनको कम से कम टेस्टिंग करने के लिए तो छूट मिले। ताकि कोई ग्राहक आता है तो उसको विश्वसनीय काम करके दिया जाए।
समस्या का समाधान की रहेगी कोशिश: मौके पर पहुंचे सिविल थाना एसएचओ गुरविंद्र सिंह ने कहा कि दुकानदारों व कारीगरों की टेस्टिंग की बात जायज है। लेकिन महामारी को देखते हुए टेंस्टिग पर जाते समय मास्क व हेल्मेट जरूर पहनें। इससे आपकी महामारी से भी बचोगे और दुर्घटना से भी। एसएचओ ने कहा कि चौक पर चालान करने की बात वह टीम इंचार्ज से बातचीत कर समस्या का समाधान करेंगे। यह पुराना नाका है, यहां पर अपराध रोकने की दृष्टिगत आगे भी जांच जारी रहेगी। नाका खत्म नहीं किया जा सकता। सुरक्षा की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण है। पुलिस की मंशा किसी को तंग करने की नहीं है। इतना ही नहीं इस नाके पर अधिक चालान नहीं होते, यहां एवरेज 10-15 चालान हर रोज का रिकॉर्ड है। इसके बाद सभी दुकानदारों ने चाबी वापस लकर दुकानें खोल ली।
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