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Kaithal News: शिव कांवड़ सेवा संघ सालों से कर रहा कांवड़ियों की सेवा

Wed, 31 Jul 2024 05:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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ढांड। शिव कांवड सेवा संघ ढांड गत 38 वर्षों से कांवड़ियों की सेवा में लगा हुआ है। इसके तहत ठहरने, स्नान करने, खाने-पीने और मेडिकल की सुविधाएं दिन रात दी जा रही हैं।

शिव कांवड़ सेवा संघ ढांड के प्रधान कश्मीर सिंह ने बताया कि 38 वर्ष पहले कैथल के व्यापारियों ने यहां आकर हमसे कांवड़ियों की सेवा के लिए शिविर लगाने के लिए जगह की मांग की। हमारे मन में उसी दिन से विचार आया कि जब कैथल से आकर व्यापारी भाई ढांड में कावड़ियों की सेवा के लिए शिविर लाग सकते हैं तो हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते।
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तब उसी दिन ढांड के मार्केट के दुकानदारों को एकत्रित कर सलाह करके कावड़ियों के लिए शिविर लगाने की ठान ली। उस दिन से आज तक पीछे मुड़ कर नहीं देखा और हर वर्ष सावन के महीने में कांवड़ियों के लिए श्री राधा कृष्ण धर्मशाला में शिविर लगाते आ रहे हैं। प्रधान ने बताया कि यह शिविर मंडी आढ़तियों, दुकानदारों, ग्रामीणों के सहयोग से लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिविर में सुविधाएं दिन रात दी जा रही है। मंगलवार को शिविर में सेवा करने वालों में समाज सेवी रामचंद्र जडौला, मा.सुभाष, धीर सिंह सरपंच आहूं, विनोद गर्ग आदि शामिल रहे।

कलायत में लगाया शिविर

कलायत। शहर में शिव कांवड़ संघ की ओर से कांवड़ियों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर शिविर लगाया गया है। इसमें उनके लिए खाना, चाय, पानी, ठहरने की व्यवस्था के साथ-साथ चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है। संघ के सदस्यों, विनोद गर्ग, गोपाल वर्मा, शशि भूषण और जसबीर राणा ने बताया कि शिविर की शुरुआत रविवार से की गई है। अब तक इसमें 400 कांवड़िये रात्रि विश्राम कर चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि मंगलवार को एक भक्त भगवान भोले नाथ की एक प्रतिमा व गंगाजल अपने कंधों पर लेकर शिविर में पहुंचा। शिविर में ठहरने वाले कांवड़ियों की सुख-सुविधा के लिए संघ के सदस्य 24 घंटे मौजूद रहते हैं। उन्होंने बताया कि यह शिविर शिवरात्रि तक जारी रहेगा। देश में कांवड़ यात्रा कई स्थान से शुरू होती है। उत्तर भारत में उत्तराखंड में हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री से गंगा नदी का पवित्र जल लेकर अपने नजदीकी मंदिर में जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। कांवड़ यात्रा करने वाले लोगों पर भगवान शिव की कृपा बरसती है। संवाद
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