स्वामी रामदेव व अपने पति के साथ अमर राविश। स्वयं
कैथल। घर की चहारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए अमर राविश पिछले कई वर्षों से काम कर रही हैं। उन्होंने गांवों और कस्बों में महिलाओं को योग से जोड़कर न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया, बल्कि उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए भी प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली अनेक महिलाएं आज स्वयं योग प्रशिक्षक बनकर आजीविका कमा रही हैं। कुछ महिलाओं ने विदेशों में भी अपनी पहचान बनाई है। महिला पतंजलि योग समिति की राज्य प्रभारी अमर राविश ने महिलाओं को सामाजिक संकोच से बाहर निकालने के लिए योग को माध्यम बनाया। शुरुआत में गांवों की महिलाएं घर से बाहर निकलने और सार्वजनिक गतिविधियों में भाग लेने से हिचकिचाती थीं। ऐसे में उन्होंने महिलाओं से संपर्क कर उन्हें योग शिविरों में आने के लिए प्रोत्साहित किया। धीरे-धीरे महिलाएं जुड़ती गईं और उनमें आत्मविश्वास बढ़ने लगा।
योग सीखने आईं महिलाएं अब दूसरों को दे रहीं प्रशिक्षण
अमर राविश के प्रयासों से योग सीखने वाली कई महिलाएं आज दूसरों को प्रशिक्षण दे रही हैं। इससे उन्हें समाज में अलग पहचान बनाने के साथ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने का अवसर भी मिला है। अमर राविश ने कहा कि महिलाओं को केवल घर तक सीमित रखने के बजाय उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने वर्ष 2006 में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण योग शुरू किया था। बाद में स्वामी रामदेव के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेकर इसे सामाजिक कार्य का माध्यम बनाया। उनका मानना है कि एक महिला के आत्मनिर्भर बनने से पूरे परिवार और समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
स्वामी रामदेव व अपने पति के साथ अमर राविश। स्वयं