संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में बुधवार से विभिन्न शैक्षणिक सत्रों की सत्रीय परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। इससे पूर्व विश्वविद्यालय ने 28 नवंबर से 2 दिसंबर तक सेतु परीक्षा का सफल आयोजन किया था।
कुलगुरु प्रो. राजबीर सिंह ने परीक्षाओं की शुरुआत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षाएं केवल ज्ञान का आकलन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के धैर्य और एकाग्रता की भी परीक्षा होती हैं। उन्होंने सभी छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए आशा जताई कि वे कठिन परिश्रम और लगन के बल पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे। कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य संस्कृत भाषा का संरक्षण और संवर्धन करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना है।
परीक्षाओं के सुचारु और नकल-मुक्त संचालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इसी क्रम में परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोदला और प्रो. जगत नारायण कौशिक ने बुधवार सुबह विश्वविद्यालय के टीक परिसर स्थित प्रातःकालीन परीक्षा केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परीक्षा केंद्र का माहौल शांतिपूर्ण और अनुशासित पाया गया।
छात्रों की सुविधा के लिए चार परीक्षा केंद्र
परीक्षा नियंत्रक प्रो. बोदला ने बताया कि इस वर्ष परीक्षा प्रक्रिया को सहज और छात्रों के लिए अधिक सुलभ बनाने हेतु कुल चार परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं।
इसमें विश्वविद्यालय का टीक परिसर में दो केंद्र प्रातःकालीन व सायंकालीन सत्र, माता मनसा देवी राजकीय संस्कृत महाविद्यालय पंचकूला व ब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय, रामराय, जींद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभी केंद्रों पर सुरक्षा एवं निगरानी के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि परीक्षा की शुचिता पूरी तरह कायम रहे।
परीक्षा के तुरंत बाद मूल्यांकन परिणाम जल्द घोषित होगा
प्रो. बोदला ने बताया कि अधिकांश सत्रीय परीक्षाएं दिसंबर माह के अंत तक संपन्न हो जाएंगी। इसके तुरंत बाद मूल्यांकन कार्य शुरू कर दिया जाएगा, ताकि समय पर परिणाम घोषित किए जा सकें और नए शैक्षणिक सत्र की तैयारियां बिना देरी के शुरू हो सकें।