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अलग आरक्षण हमारा संवैधानिक अधिकार : दर्शन

Tue, 03 Sep 2024 05:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। आदि धर्म समाज के मुखिया दर्शन रतन रावण ने अलग आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दूरदर्शी और मानवता से परिपूर्ण फैसला लेते हुए अपने ऐतिहासिक फैसले में व्यवस्था दी है कि बिना किसी बहाने या डर के राज्य सरकारें आरक्षण में वर्गीकरण कर सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने उस अंतिम पड़ाव से भी नीचे गर्क में पड़े आदमी के बच्चों के भविष्य को ख्याल में रखते हुए अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए अलग आरक्षण यानि कि वर्गीकरण की व्यवस्था दी। वे सोमवार को लोक निर्माण विश्राम गृह में पहुंचे थे। कहा कि दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आज हाशिए पर खड़े इंसान को अगड़ा दलित इंसान भी नहीं मान रहा क्योंकि ये दलित सत्ता पर काबिज और साधन संपन्न हो गए हैं।
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उन्होंने कहा कि हमने सदा देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है, चाहे वो युद्धकाल हो या कोरोना काल हो। हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि दलित कहलाने और शोषण की बात करने वाला आज का अगड़ा दलित हमारे खिलाफ जहर उगलने के लिए सीधे सड़कों पर उतर अएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कहा कि हिस्सेदारी दी जाए। इस बारे कुतर्क दिया जा रहा है कि इससे फूट पड़ेगी।

नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे तर्क आज दलितों में फूट डालने वाले अगड़े दलित दे रहे हैं। मायावती ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों के नाम दलित महापुरुषों के नाम पर रखे मगर वाल्मीकि नाम कहीं नहीं रखा। एक लाख आठ हज़ार से ज्यादा सफाई कर्मचारी पदों पर भर्ती की लेकिन इनमें 8000 वाल्मीकि भी नहीं चुने गए। तो जहां वे पूरे हो सकते थे, वह जगह भी उनसे छीन ली गई।

उन्होंने कहा कि हम केवल हिस्सेदारी ही चाहते हैं जो कि हक है। जहां तक दलित एकता की बात है हमने तो हमेशा आगे बढ़कर लड़ा है। हम आदि, आदिवासी और आदि-धर्म की बात करते हैं।
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इस अवसर पर विरोतम कैलाश पुरषार्थी, नरेश देवांतक, करमजीत बालू, धर्मपाल रति, केदार वाल्मीकि, साहिल बड़सीकरी, महेंद्र मचल, जसवंत शम्भुक, रवि अठवाल, रवीन आदि उपस्थित थे।
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