शहर की तीनों अनाज मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। नमी के कारण धान की सही कीमत नहीं मिल पा रही है। जिस कारण किसानों को मंडी में ही धान की रखवाली करनी पड़ रही है। वहीं मौसम को देखते हुए फसल काटकर मंडी में लाने को मजबूर हैं। पूरे रेट के लिए वे धान सुखाएं तो उनकी खेतों में खड़ी फसल की कटाई नहीं हो पा रही। दूसरी ओर नियमित बोली ना होना भी उनके लिए समस्या बनी हुई है। बारीक धान की कीमतों में भी 100 रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
किसानों को नहीं मिल रहे धान की विभिन्न किस्मों के पूरे रेट: मंडी में किसानों को धान की विभिन्न किस्मों के पूरे रेट नहीं मिल रहे। सरकार की ओर से पीआर धान के लिए 1835 रुपये प्रति क्विंटल तक समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है, लेकिन यह 1650 से 1800 रुपये तक बिक रहा है। मंडी में धान लेकर पहुंचे किसान बलकार सिंह, बलवीर सिंह, संदीप, साहब सिंह, गुरबाज, बलराज, कृष्ण व बीराराम ने बताया कि नमी के नाम पर फसल के रेट में बड़ी कटौती की जा रही है। बारिक धान के रेट तो किसानों को उनकी मेहनत के अनुसार सही नहीं मिल रहे। हालांकि रेट 2700 रुपये तक पहुंचते हैं, लेकिन फसल 2400 रुपये तक बिक रही है।
पिछले वर्ष से 46 हजार क्विंटल ज्यादा पहुंची 1509 किस्म की धान: मंडी में अब तक पिछले वर्ष से 46 हजार क्विंटल ज्यादा 1509 किस्म की धान मंडी में पहुंच चुकी है। मंडी में 1509 धान एक लाख 98 हजार 660 क्विंटल पहुंची है। ऐसे ही पीआर किस्म की धान ीकी भी करीब साढ़े चार हजार क्विंटल तक आवक पिछले वर्ष से ज्यादा हो चुकी है। पिछले वर्ष इन दिनों तक जहां 80 हजार क्विंटल पीआर धान मंडी में पहुंची थी, वहीं इस बार 84 हजार 350 क्विंटल धान मंडी में आ चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि धान की खरीद लगातार जारी है।
गांव बैहर पिसौल से मंडी में 1509 फसल लेकर पहुंचे किसान गुरबाज सिंह ने बताया कि धान का रेट 2700 रुपये तक है, लेकिन उसकी फसल के रेट मात्र 2300 रुपये मिले हैं। ये रेट फसल पकने तक हुए खर्च को देखते हुए काफी कम हैं। कम से कम 2600 रुपये तक तो उनकी धान जरूर खरीदी जानी चाहिए।
खाद व दवाइयों का खर्च और उनकी मेहनत ही होती है पूरी: गांव फरियाबाद से फसल लेकर पहुंचे किसान बलराज ने बताया कि उसकी 1509 किस्म की धान के रेट 2400 रुपये मिले हैं। बोली देते समय फसल में नमी बताकर रेट कम कर दिए गए। सरकार को चाहिए कि इस ओर ध्यान दे। फसल पर किया गया खाद व दवाईयों का खर्च और उनकी मेहनत ही पूरी होती है। किसानों को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिल रहा।
एसीएस के आदेश अभी तक नहीं हुए लागू : दो दिन पूर्व मंडी का दौरा करने पहुंचे एसीएस पीके दास ने धान की बिक्री में चुंगी काटे जाने की परंपरा को बंद करने व मजदूरों को मास्क देने के आदेश दिए थे। लेकिन अभी तक इन आदेशों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं धान की नमी मापने के लिए सभी खरीददारों को यंत्र साथ रखने के निर्देश दिए थे, इन आदेशों की भी कोई पालना नहीं की जा रही। कई खरीददार केवल हाथ में लेकर धान को देखकर नमी का फैसला कर रहे हैं। जिससे कई बार किसानों को संतुष्टी नहीं होती।
किसान धान को सूखाकर लाएं मंडी में: मार्केट कमेटी सचिव दलेल सिंह ने बताया कि मंडी में धान की फसल पहुंचने के साथ ही बिक्री हो रही है। कई बार फसल में ज्यादा नमी होती है, जिस कारण किसानों को बेचने से पहले फसल सुखानी पड़ती है। इसी कारण मंडी में आते ही फसल की बोली नहीं हो पाती। उन्होंने किसानों से अपील की कि फसल को अच्छी तरह से सुखाकर मंडी में लाएं, ताकि उन्हें यहां इंतजार न करना पड़े।