संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला चीका/कैथल। धान का यह सीजन किसानों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। मंडियों में आने वाला धान जब मजदूर साफ करते हैं तो उसमें दाने से ज्यादा फूस निकल रहा है। यह हवा में उड़ जाता है। अपनी छह महीने की मेहनत को फूस बनते देख किसानों के सपने भी बिखरते नजर आ रहे हैं।
जुलाई-अगस्त में धान की रोपाई के तुरंत बाद बौने पौधे (फिजी वायरस) की समस्या सामने आई। किसानों ने बताया कि उन्होंने महंगी दवाइयों के स्प्रे किए, लेकिन कुछ लाभ नहीं हुआ और कई किसानों को धान नष्ट करना पड़ा। इसके तुरंत बाद बाढ़ ने फसलों को नुकसान पहुंचाया। इन दोनों समस्याओं के बाद भी
किसानों ने बताया कि उनको उम्मीद थी कि फसल लागत अवश्य पूरी करेगी, लेकिन कटाई से पहले हल्दी रोग ने धान की पैदावार पर गहरा असर डाला। दाने कम बने और उनका रंग काला पड़ गया। मंडी में जब ट्रालियां उतारी जाती हैं तो दाना कम और फूस ज्यादा देखकर किसान के चेहरे बुझ जाते हैं।
एक एकड़ में निकला मात्र 8 क्विंटल धान
गुहला-चीका।कच्ची पिसौल के किसान स्वर्ण सिंह ने अपनी दो एकड़ की धान चीका मंडी में लाई। मजदूरों ने जब सफाई की तो आधा से अधिक धान फूस बनकर उड़ गया। उन्होंने बताया कि उनके दो एकड़ में कुल मात्र 18 क्विंटल धान ही निकला। छह माह की मेहनत के अलावा एक एकड़ पर 30 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। स्वर्ण सिंह बोले- समझ नहीं आ रहा कि गुजारा कैसे चलाऊं। संवाद
करनैल सिंह बोले, धान की जगह निकल रहा फूस ः
खरका गांव के किसान करनैल सिंह ने बताया कि मौसम इस बार धान की फसल के विपरीत रहा। एक एकड़ में मात्र 15 क्विंटल धान की पैदावार हुई, जो औसतन 32 क्विंटल से आधे से भी कम है। उन्होंने कहा कि अबकी धान की जगह फूस निकल रहा है। करनैल सिंह ने कहा, इस बार हुए नुकसान से किसान अगले पांच साल तक भी नहीं उबर पाएंगे।
मदद नहीं मिली तो बर्बाद हो जाएंगे किसान ः हरविंद्र सिंह
गांव चक्कू के किसान हरविंद्र सिंह ने कहा कि धान की कम पैदावार ने किसानों के सारे सपने बिखेर दिए हैं। उन्होंने कहा कि दशहरा और दिवाली के त्योहार आ रहे हैं, लेकिन फसल की स्थिति से त्योहार फीके पड़ गए हैं। अगर सरकार आर्थिक मदद नहीं करेगी तो किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।
आढ़तियों को भी पड़ेगी आर्थिक मार : कर्म चंद गर्ग
गुहला-चीका। अनाज मंडी एसोसिएशन चीका के प्रधान कर्म चंद गर्ग ने कहा कि इस बार बीमारियों से धान की कम पैदावार ने किसानों को भारी नुकसान पहुँचाया है, लेकिन इसका असर आढ़तियों पर भी पड़ेगा। कर्म चंद गर्ग ने बताया कि पैदावार 30 से 40 प्रतिशत तक कम रहने का अनुमान है। कम पैदावार से किसान के साथ-साथ मंडियों में काम करने वाले मजदूर, आढ़ती और राइस मिलरों को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। संवाद