संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सेक्टर-18 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की जमीन पर सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सेक्टरवासियों के लिए बनाई गई सार्वजनिक पार्किंग को सड़क निर्माण में लगी एजेंसी ने अपना डंपिंग यार्ड बना लिया है। पार्किंग स्थल पर भारी मात्रा में रोड़ा, बजरी और मिट्टी डालने के कारण सतह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। इसके चलते धूल और गंदगी फैल रही है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
निकटवर्ती नागरिक अस्पताल में मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी यह स्थिति परेशान कर रही है। डंपिंग यार्ड बनने से न केवल पार्किंग की जगह खत्म हुई है, बल्कि विभाग की करोड़ों की संपत्ति भी बर्बाद हो रही है। नाराज सेक्टरवासियों का कहना है कि यह मिलीभगत है।
पार्किंग बनवाने में चक्करों की मेहनत बेकार
सेक्टरवासियों का कहना है कि यह सेक्टर अब भी पूरी तरह विकसित नहीं है और यहां की मौजूदा सुविधाएं मिलीभगत से समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। बलबीर ने बताया कि पार्किंग के निर्माण के लिए उन्होंने कड़ी मशक्कत कर दफ्तरों के चक्कर काटे थे, लेकिन अब इसे फिर से तोड़ा जा रहा है।पार्किंग में पड़े मिट्टी और निर्माण सामग्री के बड़े ढेरों से धूल पूरे सेक्टर में उड़ती रहती है। लोग मांग कर रहे हैं कि नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई हो। यदि जल्द ही निर्माण सामग्री नहीं हटाई गई और पार्किंग की मरम्मत नहीं हुई, तो वे उच्च अधिकारियों तक शिकायत करेंगे।
मिलीभगत और मुफ्तखोरी का खेल
सेक्टर-18 एसोसिएशन के प्रधान बलबीर और अन्य लोगों का आरोप है कि नियमानुसार किसी भी सरकारी जमीन के व्यावसायिक उपयोग पर निर्धारित शुल्क वसूलना अनिवार्य है। लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकारी खजाने को चूना लगाकर निजी एजेंसी को लाभ क्यों पहुँचाया जा रहा है। जब कोई सेक्टरवासी निर्माण कार्य करता है, तो विभाग सामग्री डालने के लिए 15 से 20 हजार रुपए प्रति प्लाट वसूलता है, लेकिन इस मामले में आंखें मूंद ली गई हैं
जांच का आश्वासन
एचएसवीपी के संपदा अधिकारी वकील अहमद ने कहा कि सेक्टरवासियों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी। साथ ही यह देखा जाएगा कि एजेंसी ने जो मलबा डाला है, उसका निर्धारित शुल्क जमा कराया गया या नहीं। किसी भी लापरवाही के मामले में कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।