दाखिले के समय लगभग सभी निजी स्कूलों में अभिभावकों से स्पोर्ट्स फंड वसूला जाता है। लेकिन अभी तक करीब 100 प्राइवेट स्कूलों ने शिक्षा विभाग में स्पोर्ट्स फंड नहीं जमा करवाया है। जिसके चलते इन स्कूलों के बच्चे सोमवार से होने वाले ब्लॉक स्तरीय खेलों में भाग नहीं ले पाएंगे। ब्लॉक से लेकर ये प्रतियोगिताएं नेशनल लेवल तक होती हैं। जिसके प्रमाण पत्र बच्चों के भविष्य में काफी काम आते हैं लेकिन फंड वसूली के चक्कर में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।
दाखिले के समय विद्यार्थियों से ली जाती है मोटी रकम
प्राइवेट स्कूल दाखिले के समय पर विद्यार्थियों से स्पोर्ट्स फंड के नाम पर 300 से 500 रुपये वसूलती है। लेकिन उन विद्यार्थियों को जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने तक नहीं ले जाया जाता है। शिक्षा विभाग में स्पोर्ट्स फंड भरने से बचने के लिए निजी स्कूल संचालक बच्चों को खेलों से दूर रखते हैं। जिससे बच्चों का काफी नुकसान होता है।
इस प्रकार लिया जाता है स्पोर्ट्स फंड
जिले के सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों से स्पोर्ट्स फंड लिया जाता है। जिसमें विद्यार्थियों को ब्लॉक स्तर, जिला स्तर व फिर राज्य स्तर पर फंड से सुविधाएं दी जाती है। कक्षा छठी, सातवीं व आठवीं के विद्यार्थियों को छह रुपये प्रति विद्यार्थी, कक्षा नौंवी व दसवीं के विद्यार्थियों ने 25 रुपये प्रति विद्यार्थी और कक्षा ग्यारहवीं व बारहवीं के विद्यार्थियों को 50 रुपये प्रति विद्यार्थियों के हिसाब से फंड भरना होता है।
विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़
खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ी पुनीत कुमार, अशोक शर्मा, राजीव कुमार, शोभा, कोमल, रेणु, सपना ने बताया कि दाखिले के समय जब प्राइवेट स्कूल स्पोर्ट्स फंड लेते हैं तो उनको शिक्षा विभाग में स्पोर्ट्स फंड जमा करवाकर विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए। पैसे कमाने के चक्कर में स्पोर्ट्स फंड जमा न करवाकर प्राइवेट स्कूल संचालक विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
जिस स्कूल का स्पोर्ट्स फंड जमा नहीं होगा उस स्कूल के विद्यार्थी एक अगस्त से शुरू हो रही ब्लॉक स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकते है। करीब 100 प्राइवेट स्कूलों ने स्पोर्ट्स फंड जमा नहीं करवाया है। सरकारी स्कूलों ने स्पोर्ट्स फंड जमा करवा दिया है। जिला स्तर व राज्य स्तर पर विद्यार्थियों के लिए आने-जाने व खाने के लिए स्पोर्ट्स फंड से राशि खर्च होती है।
शमशेर सिरोही, डिप्टी डीईओ
शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में खेल कलेंडर जारी करता है। खेलों से संबंधी सभी प्रकार की सूचना सरकारी स्कूलों को देता है। निजी स्कूलों को खेल कलेंडर व खेलों से संबंधी कोई सूचना नहीं होती है। अगर शिक्षा विभाग स्पोर्ट्स फंड की उम्मीद प्राइवेट स्कूलों से करता है तो उसकी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।
रवि भूषण गर्ग, प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान