संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महेंद्रगढ़ हादसे के बाद स्कूली बसाें की जांच की जा रही है, लेकिन अभी तक स्कूली ई रिक्शा आैर ऑटो बेअंदाज हंै। इसके चलते अपनी ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चों को लेकर स्कूल जाते हैं। ऐसे में हादसों की संभावना अधिक रहती है।
शहर में 500 से अधिक ऑटो स्कूली बच्चों को स्कूल ले जाने और घर लाने के लिए लगे हैं। सुरक्षित यात्री परिवहन के लिए सरकार ने नियम तो बहुत बनाए हैं, लेकिन वाहन चालक 50 प्रतिशत नियमों का पालन नहीं करते। इसी के परिणामस्वरूप स्कूली बच्चों को स्कूल व घर ले जाने वाले ऑटो, ई रिक्शा चालकों पर प्रशासन नकेल नहीं कसता। इनकी लापरवाही से कभी किसी के साथ हादसा घटित हो सकता है। जिले में लगभग 500 निजी स्कूल हैं। इनमें दो लाख से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से 40 फीसदी बच्चे ऑटो, रिक्शा व स्कूली वाहन के माध्यम से स्कूल आते जाते हैं। इन वाहनों में बच्चों को ठूंसकर बैठाया जा रहा है। सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है लेकिन जिम्मेदार कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। लगता है उन्हें इंतजार है कि महेंद्रगढ़ के कनीना व यमुनानगर में हादसा हुआ है वैसा ही हो। इससे पहले इन लापरवाह ऑटो चालकों पर कार्रवाई के लिए परिवहन विभाग हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। परिणामस्वरूप विभाग की यह लापरवाही बच्चों पर भारी पड़ सकती है।
वाहन चालक कर रहे नियमों की अवहेलना
शहर में चल रहे स्कूली ऑटो में न सिर्फ क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए जा रहे हैं। बल्कि उनमें आवश्यक सावधानियां भी नहीं बरती जा रही है। ज्यादातर अभिभावक भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे भी बच्चों की जान जोखिम में डालकर उन्हें लापरवाह ऑटो चालकों के साथ स्कूल भेज रहे हैं। इससे कभी भी हादसा हो सकता है। आरटीए सचिव शीशपाल ने इस पर बताया कि स्कूलों बसों की फिटनेस जांच जारी है। ऑटो ई रिक्शा की जांच स्कूल बसों की जांच पूरी होने के बाद की जाएगी।