संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत के प्राचीन श्री कपिल मुनि सरोवर मेंं उभरी गोलाकार आकृतियों मेंं सरस्वती की जलधारा जारी है। पानी निकासी के लिए लगाई मोटरों के कारण सरोवर मेंं पानी का स्तर बेहद नीचे चला गया है, लेकिन गोलाकार आकृतियों से पानी की धारा के फूटने का क्रम जारी है। यही वजह है कि सरोवर के पानी की पूरी तरह निकासी करने मेंं अधिकारियों को सफलता नहीं मिल पा रही है।
गौरतलब है कि गत 14 अप्रैल को सरस्वती नदी उत्कृष्ट शोध केंद्र के निदेशक प्रोफेसर एआर चौधरी की अगुवाई में अधिकारियों का दल कलायत पहुंचा था। इस दौरान प्राचीन श्री कपिल मुनि सरोवर पर हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. प्रभाकर वर्मा, तकनीकी सलाहकार रविकांत उप्पल, वैज्ञानिक अविनाश शारदा, सैंपलिंग इकाई से सुभाष राजपूत, आशुतोष बंसल और अन्य अधिकारियों ने काफी समय मुआयना किया। इसमें वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि कलायत क्षेत्र अपने अंदर चार से पांच लाख वर्ष पुरानी संस्कृति समेटे है।
प्राचीन श्री कपिल मुनि सरोवर में फूटी सरस्वती की जलधारा और संबंधित तमाम पहलु इसका प्रमाण हैं। सरस्वती नदी उत्कृष्ट शोध केंद्र के निदेशक प्रोफेसर एआर चौधरी ने कहा कि पद्म विभूषण दर्शन लाल जैन ने सरस्वती की तलाश करते हुए इसको विकसित करने का बीड़ा उठाया था। इस लक्ष्य को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कलायत में प्राचीनतम सभ्यता की गवाह बनी सरस्वती नदी के प्रति गंभीरता का परिचय देते हुए टीमों को गतिशील किया।
सीएम के राजनैतिक सलाहकार भारत भूषण भारती इसकी समीक्षा कर रहे हैं। सरस्वती नदी उत्कृष्ट शोध केंद्र पूरे भारत देश मेंं इस नदी पर शोध का जिम्मेदारी संभाले है। कुुरुक्षेत्र इसका मुख्यालय है। कपिल सरोवर के विकास से जुड़ी करोड़ों रुपए की योजनाओं के लिए पुरातत्व विभाग ने एनओसी प्रदान कर दी है। पिछले काफी समय से इसमें बड़ा पेंच फंसा था।
हरियाणा सरस्वती बोर्ड चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमच भी प्राचीन कपिल मुनि सरोवर पर टीम के साथ पहुंचे थे। उन्होंने न केवल मुआयना किया बल्कि यह भी माना कि जो पानी सरोवर में फूट रहा है वह सरस्वती नदी का है। इससे पहले भी सरस्वती नदी की धारा फूटने का क्रम इस सरोवर में जारी रहा है।