कैथल में गीता भागवत प्रचार समिति द्वारा भगवान जगन्नाथ दर्शन यात्रा के अवसर पर चौथी संध्या फेरी निकाली गई। सांध्या फेरी का आयोजन वृंदावन से पधारे तेजस्वी दास के पावन सानिध्य में किया गया। संध्या फेरी कुरुक्षेत्र रोड । तेजस्वी दास ने कहा कि शुक्ल आसाढ द्वितीय तिथि को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलदेव व सुमित्रा बहन के साथ अपने महलों से बाहर निक लकर भ्रमण करते है। जो भी जीव इस भव्य दर्शन रथयात्रा का रस्सा खींचता है उसके कोटी-कोटी के जन्म के पुन्य पल मे अर्जित हो जाते है। तेजस्वी दास ने कहा कि कलियुग में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करने व हरे कृष्णा महामंत्र का जाप करने से मनुष्य का कल्याण होता है।
श्रीमद्भागवत कथा हमें भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से अवगत करवाती है। हमें भक्ति रस में सराबोर कर देती है। निकुंजा ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के सामूहिक नामों के कीर्तन व जाप करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते है। उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा को जीवन का सार बताया और कहा कि भागवत कथा हमें सद्कर्म करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि संसार दु:खों का घर है। जन्म लेने के बाद मनुष्य को विभिन्न प्रकार के दु:खों का सामना करना पड़ता है। बुद्धिमान मनुष्य वही है जो सुख-दु:ख व लाभ-हानि में समान भाव से रहता है।
तेजस्वी दास ने कहा कि हमें मोक्ष की प्राप्ति के लिए अपने मन से अहंकार की भावना को मिटाना होगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने मन में यह विचार लाना चाहिए कि मैं कुछ नहीं हूं, जो कुछ भी है वह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण है और मैं उनका दास हूं। उन्होंने कहा कि भगवान को प्राप्त करने का एक मात्र उपाय भक्ति है। भक्ति किसी भी दुकान पर प्राप्त नहीं हो सकती है, इसे किसी भी कीमत पर खरीदा नहीं जा सकता। भक्ति तो मन की भावना होती है, जिसकी भावना प्रभु के श्रीचरणों में रम जाती है। उसे ही भक्ति की प्राप्ति होती है।
इस अवसर पर दीपक अरोडा, चंद्र सीकरी, जगमाहन, नगर पार्षद महेंद्र थरेजा, गुलशन, राकेश गुप्ता, प्राजंल थरेजा प्रेमम चावला, रजत, दिनेश , साहिब, मुकेश, सौरभ, गौरव धीमान, पवन मौजूद रहे।