ई-स्टांपिंग के जरिए करना होगा स्टांप पेपर्स के लिए भुगतान
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यदि आप मकान, दुकान या फिर प्लाट की रजिस्ट्री करवाने जा रहे हैं तो यह खबर आपके लिए काफी महत्वपूर्ण है। सरकार द्वारा पिछले साल लागू की गई ई-स्टांपिंग योजना के तहत अब जिला प्रशासन ने स्टांप पेपर्स लेना पूरी तरह से बंद कर दिया है। गत एक जुलाई से रजिस्ट्री के लिए भुगतान केवल ई-स्टांपिंग से होगा। केवल रजिस्ट्री संबंधी कार्य में स्टांप पेपर्स के प्रयोग पर रोक लगाई गई है। ताकि लोगों को रजिस्ट्री के लिए नकदी उठाकर इधर-उधर ना भटकना पड़े।
क्या है प्रक्रिया
लोग रजिस्ट्री करवाने के लिए नकदी लेकर स्टांप पेपर खरीदते रहे हैं। रजिस्ट्री में कलेक्टर रेट या फिर जमीन की कीमत के हिसाब से स्टांप पेपर लगाए जाते हैं। ज्यादा बड़ी जमीन की खरीद-फरोख्त में ज्यादा राशि के स्टांप पेपर का प्रयोग होता है। जिस कारण कई बार लोगों को लाखों रुपये लाने एवं ले जाने पड़ते हैं। जिसमें जोखिम तो होता ही है, साथ में कई बार स्टांप पेपर खरीदने में भी परेशानी आती है। इसीलिए अब सरकार ने जमीनों की रजिस्ट्री में ई-स्टांपिंग अनिवार्य कर दी है।
क्या है ई-स्टांपिंग
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री के लिए आपको संबंधित बैंक में जाना होगा। फिर अपने खाते से या फिर नकद राशि देकर बैंक अधिकारियों से सरकार के जमीन की रजिस्ट्री वाले खाते में पैसे जमा करवाने के लिए कहना पड़ेगा। इसके बाद बैंक कर्मचारी संबंधित खाते में उतनी राशि जमा कर देंगे, जितनी के स्टांप पेपर खरीदने होंगे। राशि जमा होने की सूचना तहसीलदार कार्यालय में एक कोड के माध्यम से कंप्यूट%