संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। आर्य समाज फाउंडेशन एवं पतंजलि योग समिति चीका ने श्री विश्वकर्मा मंदिर चीका में शहीद भगत सिंह के बलिदान दिवस पर रविवार को सनातन संस्कृति को जानो और खुद को पहचानो नामक एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत आचार्य पंडित सत्यवीर शास्त्री ने हवन के साथ की। बतौर मुख्य अतिथि भजन उपदेशक आचार्य धर्मपाल आर्य ने कहा कि हमारी संस्कृति एक धरोहर है जिसे हमें बचाना है। उन्होंने कहा कि वेद ही सभी धर्म का मूल है। उनका कहना है कि आयोजन का लक्ष्य ईश्वर, वेद,यज्ञ, ऋषि दयानंद और आर्य समाज द्वारा वैदिक मान्यताओं का प्रचार है। उन्होंने कहा कि जिनके गुण, कर्म और स्वभाव श्रेष्ठ हैं वह आर्य है। वेद ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक है। योगीराज श्री कृष्ण वेद की आज्ञाओं का पालन करते थे।
धर्मपाल आर्य ने कहा कि यदि हम सनातन धर्म के प्रति अपनी सच्ची आस्था रखते हैं तो हम सभी को शिखा व जनेऊ धारण करना चाहिए, ताकि सनातन धर्म को मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि यजुर्वेद में ज्ञान, दीर्घायु व धन-संपत्ति की सुरक्षा पाने के लिए प्रार्थनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि यज्ञ करने से वायु, वर्षा व जल की उत्तम शुद्धि होती है। ऐसी शुद्धि किसी दूसरे तरीके से नहीं हो सकती, इसलिए प्रतिदिन यज्ञ करके सभी प्राणियों के कल्याण की भावना रखनी चाहिए। इससे संसार के सभी रोग व दोष नष्ट हो जाएंगे। इस अवसर पर आर्य समाज फाऊंडेशन के प्रधान सुरेंद्र आर्य, पंतजलि जिला प्रभारी आचार्य हरिओम आर्य, हर्षित आर्य, विक्की आर्य, अमित आर्य, शिशपाल आर्य, रामफल आर्य, कामरेड कृष्ण आर्य भी मौजूद रहे।