संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से पुराना बस अड्डा परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में साध्वी आस्था भारती ने कहा कि जब धर्म के दस गुण मानव जीवन में प्रतिष्ठित होते हैं तो व्यक्ति का अंतःकरण सुंदर और पवित्र बन जाता है। इससे समाज स्वतः ही आदर्श और शांतिमय बन जाता है।
उन्होंने बताया कि धर्म प्रकट होने पर वह अपने दस लक्षण—धैर्य, क्षमा, संयम, अस्तेय, पवित्रता, इंद्रिय निग्रह, शुद्ध बुद्धि, सत्य, उत्तम विद्या और अक्रोध—मनुष्य के भीतर स्थापित करता है।
संस्थान की ओर से 9 से 15 मार्च तक पुराना बस स्टैंड कैथल में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के पांचवें दिन साध्वी आस्था भारती ने मथुरा में भगवान के अभिवादन तथा अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक कंस वध के प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य भक्ति के सनातन मार्ग को छोड़कर मनमाना आचरण करने लगता है तो धर्म के संबंध में अनेक भ्रांतियां फैल जाती हैं। धर्म के नाम पर विद्वेष, संघर्ष, भेदभाव और अनैतिक आचरण पनपने लगते हैं। ऐसे समय में प्रभु अधर्म का अंत कर ब्रह्मज्ञान के माध्यम से प्रत्येक मनुष्य के भीतर वास्तविक धर्म की स्थापना करते हैं।
साध्वी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के अनुसार परमात्मा का साक्षात्कार ही धर्म है। जिस प्रकार रेडियो तरंगों को देखने के लिए सूक्ष्म यंत्र की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार सर्वव्यापक परमात्मा स्थूल नेत्रों से दिखाई नहीं देते। उन्हें देखने के लिए दिव्य नेत्र की आवश्यकता होती है।
कथा के दौरान पाला राम सैनी, रवी सचदेवा, हरीश कुमार, मनीष कुमार, कर्मवीर कॉल, अमरजीत छाबड़ा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।