राजौंद। लोहड़ी में महिलाओं और लड़कियों में भी विशेष उत्साह रहता है। जिस घर में लड़के का जन्म होता था, वहां लोहड़ी की धूम कई दिन पहले ही शुरू हो जाती है। लोहड़ी के दिन बच्चे और किशोर टोलियां बनाकर घरों के आंगन में पहुंचते हैं और गीत गाते हुए लोहड़ी मांगते हैं। बदले में मक्की के भूने हुए दाने और गुड़ शगुन के रूप में उनकी झोलियों में डाले जाते हैं।
हालांकि लोगों का कहना है कि पहले दाने भूनने वाली भट्ठियों पर त्योहार से कई दिन पहले ही लोगों की भीड़ लगी रहती थी। बच्चों और खासकर छोटी लड़कियों द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक गीत— “तिली हरी वे परी, तिली मोतियां झड़ी, तिली ओस वेडे जा जित्थे गुगे दा ब्याह”—अब केवल यादों और कहानियों तक सिमट कर रह गए हैं।
हालांकि, लोहड़ी के नजदीक आते ही मूंगफली, रेवड़ी और गजक का कारोबार जरूर तेज हो गया है। संवाद