कैथल। शहर में सोमवार को मानसून की पहली बरसात हुई। बारिश के बाद शहर की अधिकांश सड़कों पर जलभराव के चलते पानी ही पानी नजर आने लगा। मुख्य सड़कों का हाल ऐसा था कि पैदल चलने तक का रास्ता नहीं दिख रहा था। परेशान लोग बोले कि पहली बारिश में ही प्रशासन के तमाम इंतजामों की पोल खुल गई।
बारिश से शहर के पॉश इलाकों में हालात अधिक खराब रहे। दूसरी ओर मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिन में तेज बारिश होने की संभावना है। पहले दिन शहर में पांच एमएम बारिश दर्ज की गई। इस दौरान अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री व न्यूनतम तापमान 26.1 डिग्री दर्ज किया। मौसम में परिवर्तन से अधिकतम तापमान में पांच डिग्री व न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री की गिरावट दर्ज की गई।
गौरतलब है कि प्रदेश के कई जिलों में रविवार को मानसूनी बारिश शुरू हो गई थी जबकि कैथल शहर सूखा रहा था। सोमवार को सुबह से ही आसमान में घने काले बादल छाए थे। दोपहर को एक बजे तेज बारिश शुरू हुई थी। यह दोपहर ढाई बजे तक जारी रही। इसके बाद धूप निकली। बारिश से शहर की मुख्य सड़कों पर जलभराव हो गया। शहर में करनाल रोड, ढांड रोड, अंबाला रोड, पिहोवा चौक, रेलवे अंडर ब्रिज, भगत सिंह चौक, कबूतर चौक, लघु सचिवालय में पानी एक फीट से भी ज्यादा भरा हुआ था। लोगों को आने जाने में परेशानी उठानी पड़ी। पैदल आने-जाने वालों को ज्यादा दिक्कतें हुईं।
किसानों के खिले चेहरे
दोपहर एक से ढ़ाई बजे तक हुई झमाझम बारिश से जहां लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली, वहीं किसानों के भी चेहरे खिल उठे। धान की फसल में पानी को लेकर किसान परेशान थे और उन्हें बेसब्री से मानसून का इंतजार था। बारिश न होने की स्थिति में किसानों को अधिक पानी खेतों में देना पड़ रहा था।
बीते वर्ष से एक सप्ताह पहले आया मानसून-
बता दें कि बीते वर्ष 2022 में जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून की पहली बरसात हुई थी। इस बार जून के अंतिम सप्ताह में मानसून की पहली बरसात हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रमेश चंद वर्मा ने बताया कि आगामी दो दिनों तक बरसात की संभावना जताई जा रही है। जिले में बरसात को लेकर किसी प्रकार का कोई अलर्ट नहीं है।
किसानों को होगा फायदा-
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने कहा कि बरसात फसलों पर अमृत बनकर बरसी है। बरसात के बाद धान बिजाई के कार्य में तेजी आएगी। पिछले दिनों पड़ी भीषण गर्मी के कारण फसलों में सिंचाई की जरूरत थी। बरसात के कारण से फसलों में सिंचाई की पूर्ति हो गई है। इससे किसानों को फायदा होगा तथा पैदावार भी अच्छी होगी। किसानों को अब सिंचाई करने की जरूरत नहीं रहेगी।