अंबाला। अंबाला लोकसभा सीट पर अहम योगदान निभाने वाला मुलाना हल्का इस लोकसभा चुनाव में कड़ी इम्तिहान ले सकता है। मुलाना में कांग्रेस का ही हलका है, यहां कांग्रेस से ही वरुण विधायक रहे हैं इसके बावजूद क्षेत्र में कड़ी चुनौतियां नजर आ रही हैं।
यह चुनौतियों कांग्रेस के लिए ही नहीं बल्कि भाजपा के लिए भी हैं, क्योंकि क्षेत्र में कुछ ऐसी समस्याएं हैं जिनसे लोग वर्षों से जूझ रहे हैं। इनका समाधान किसी भी स्तर पर नहीं हुआ है। जबकि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को भी यहां की लोगों ने अच्छे वोट दिए थे। दोसड़का मुलाना का प्रमुख स्थान है। इसके आसपास कई प्रमुख गांव लगते हैं।
दोसड़का चौक पर स्थित सर्विस रोड से दिनभर में कई प्राइवेट व सरकारी बसें यात्रियाें को बैठाती हैं। जो यमुनानगर से अंबाला और अंबाला यमुनानगर जाती हैं। वहीं दूसरी बसें सढ़ोरा से बराड़ा या बराड़ा से सढ़ोरा जाती हैं। जो अंबाला से यमुनानगर जाने वाली बसें हैं वह सर्विस रोड पर ओवरब्रिज के पास और ओवरब्रिज के बीच में ही खड़ी हो जाती हैं। इससे जाम के रूप में यहां पर यातायात की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। दोसड़का निवासी संजय चानना बताते हैं कि अगर साढौरा से बराड़ा जाना हो ताे बसें बराड़ा रोड पर दुकानों के सामने रुक जाती हैं और सवारी बैठाती हैं। इन सवारियों में छात्र-छात्राएं, महिलाएं, बुजुर्ग व अन्य यात्री रोजाना धूप और बारिश में खड़े दिखते हैं।
ऐसे में इस चौक पर यात्रियों को दुकानों और रेहड़ी की शेड में खड़े देखा जा सकता है। यहां पर यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं हैं। क्यू शेल्टर नहीं है। जो क्यू शेल्टर है भी तो वह करीब एक किलोमीटर दूर है जहां पर बसें रुकती नहीं हैं। यहां तक कि पानी की व्यवस्था भी नहीं है। जबकि कुछ समय पहले दोसड़कों के लोग इसको लेकर मांग भी कर चुके हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं लंबे रूट की बसें फ्लाईओवर से सीधा गुजर जाती हैं, अगर किसी दोसड़का वासी को लंबे रूट की बस पकड़नी भी हो तो उन्हें लगभग 20 किलोमीटर से भी अधिक का सफर कर अंबाला कैंट आने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए इस क्षेत्र में कड़ा मुकाबला है।
लोस चुनाव में मुलाना से मिल चुकी शिकस्त
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मुलाना विधानसभा में भाजपा और कांग्रेस के सामने कड़ी टक्कर थी। यह क्षेत्र कांग्रेस से पूर्व मंत्री फूलचंद मुलाना का भी गढ़ रहा है ऐसे में यहां भाजपा के लिए तब भी कयास लगाए जा रहे थे कि जीतना मुश्किल होगा। मगर जब परिणाम आए तो पासा पूरी तरह से पलटा दिखाई दिया। यहां पूर्व सांसद दिवंगत रतन लाल कटारिया को 79065 वोट मिले थे तो कांग्रेस से कुमारी सैलजा को 43233 वोट ही मिल सके थे। ऐसे में दोनों प्रत्याशियों में से रतन लाल कटारिया ने 35 हजार वोटों से अधिक की लीड ली थी। मगर अब विधानसभा में कांग्रेस के प्रत्याशी तो केंद्र में भाजपा के प्रत्याशी को चुनकर भेजने के बाद लोगों के पास दोनों पार्टियों के नेताओं के कार्यों का आंकलन करने के लिए अच्छा अनुभव है। इसी आधार पर वह आगे बढ़ेंगे।