कैथल। करनाल से कैथल तक 70 किलोमीटर तक इस फोर लेन रोड के निर्माण की धीमी रफ्तार के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। इस रोड पर सफर करने के लिए एक घंटा दस मिनट के स्थान पर ढाई घंटे से अधिक का समय लग रहा है। इतना ही नहीं खस्ता हाल सड़क के कारण वाहन खराब हो रहे हैं। डीजल और पेट्रोल की खपत भी ज्यादा हो रही है। सीएम मनोहर लाल ने इस सड़क को 2015 में फोरलेन बनाने की घोषणा की थी लेकिन सड़क निर्माण की कागजी औपचारिकताएं पूरी करने में चार साल लग गए। अप्रैल 2019 में टेंडर निकाले गए, अब 2021 तक पूरा करने का आश्वासन दिया जा रहा है। करीब 187 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की लंबाई लगभग 70 किलोमीटर है। जिस तरह से निर्माण हो रहा है, इस दृष्टि से तो नहीं लग रहा है कि निर्धारित समय तक पूरा कर लिया जाएगा।
सड़क के खराब होने के कारण लोग इस रोड के स्थान पर वैकल्पिक मार्गों से जा रहे हैं। इस सड़क के बीच में कस्बों और गांवों के लोगों को परेशानी हो रही है। उन्हें वैकल्पिक वाहनों से सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग के एसडीओ गुरप्रीत सिंह कहना है कि उनके पास इस सड़क के लिए पूंडरी से बस्थली तक का मार्ग है। जिसका निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इसके लिए टेंडर 1 अप्रैल 2019 को छोड़ा गया। इससे पूर्व पेड़ आदि काटने, बजट अलॉट होने जैसी औपचारिकताएं पूरी हुईं। अब जो एजेंसी इसका निर्माण करवा रही है, वह बड़ी एजेंसी है, उम्मीद है कि वह एक साल में ही इस सड़क का निर्माण पूरा कर देगी। शीघ्र ही लोगों को खराब सड़क की परेशानी से सीएम मनोहर लाल की घोषणा से मुक्ति मिल जाएगी। सड़क को कई जगह इस तरह से बनाया जा रहा है कि लोगों को गुजरने में परेशानी ना हो।
हैडिंग
प्राइवेट बसों के संचालन में हर महीने 10 हजार से अधिक की क्षति
कैथल। प्राइवेट बस संचालक बलवान कोटड़ा ने कहा कि इस रुट पर 40 से 50 हजार रुपये प्रति माह बचते थे। खस्ता हाल इस सड़क के कारण बस का संचालन भी मुश्किल हो रहा है। चाहे डीजल हो, टायर हो या अन्य देखरेख, इन सभी पर 10 हजार रुपये से अधिक का हर महीने नुकसान हो रहा है।
2. बस संचालक रामधारी नैन ने कहा कि उनकी बसें कैथल से पूंडरी व करनाल तक चलती हैं। बसों की हालत खस्ता हो गई है। अब लाभ की बजाए नुकसान में हैं। किसी तरह सड़क बनने का इंतजार है। ताकि रोजी रोटी सही चल सके।
हैडिंग
सरकारी बसों का एवरेज घटा, टायर भी जल्दी फट रहे
जीएम रोडवेज रामकुमार ने कहा कि सरकारी बसों की एवरेज घट गया है। टायर भी जल्दी फट रहे हैं। पहले इस रुट पर चलने वाली बसों का एवरेज प्रति लीटर 5 लीटर आ रहा है, जबकि पहले यह 4.5 किलोमीटर प्रति लीटर था। इतना ही नहीं बसों के कल पुर्जों सहित अन्य देखरेख पर लागत बढ़ रही है।
यात्री-1-बस अड्डे पर बस के इंतजार में खड़े यात्री करनाल निवासी कुलदीप मान का कहना है कि पहले करनाल तक सवा घंटे लगता था। अब 2 घंटे से ज्यादा का समय लगता है। खराब सड़क के कारण बसों में खड़खड़ाहट से भी परेशानी होती है। धूल उठती है।
यात्री:-2- नैना गांव के सुनील कुमार ने कहा कि उन्हें गांव नैना तक छोटा सा रूट तय करने में भारी परेशानी होती है। बसों के अलावा सड़क की खस्ता हालत के कारण दूसरे वाहन इस रूट से नहीं आते। जिस कारण उन्हें परेशानी है।
यात्री:-3-पूंडरी निवासी रिंकू धीमान ने कहा कि पूंडरी तक महज 15 मिनट का समय लगता था। इस समय सड़क की जो हालत है, उसमें आधे घंटे का समय लगता है। वाहनों का नुकसान होता है, वह अलग।
फोटो संख्या-25 व 26, 34-जीएम रोडवेज रामकुमार, 35-कुलदीप मान, 36-सुनील नैना, 37- रिंकू धीमान, 39-प्राइवेट बस संचालक बलवान कोटड़ा, 42-रामधारी नैन