किसान आंदोलन के बीच मंडियों में धान की आवक कम होने का असर कीमतों पर पड़ा है। व्यापारी जितनी भी धान पहुंच रही है, उसे हाथों हाथ खरीद रहे हैं। जिस कारण बासमती ग्रुप की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। 1121 किस्म सहित 1509, 1719 व डुप्लीकेट बासमती की कीमतों में भारी उछाल आया है। जिससे किसान उत्साहित हैं।
किसान धान की कटाई व गेहूं की बिजाई के बाद दिल्ली कूच पर हैं। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली को चारों ओर से घेर कर किसान आंदोलन कर रहे हैं। जिस कारण अनाज मंडियों में धान की आवक कम हो गई है। काफी सारा धान इस समय मंडियों में पहुंचना बाकी है।
कैथल अनाज मंडी में जो 1121 धान एक सप्ताह पहले 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था, वह अब बढ़कर 3100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। इसी प्रकार से 1509 अधिकतम 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था, वह 2300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। 1718 किस्म जो 2200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। जिस कारण किसान उत्साहित हैं। इसी प्रकार से डुप्लीकेट बासमती 2600 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 3200 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। । नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि गेहूं की बिजाई के बाद अब धान की आवक कम हो गई है। जिसका कारण किसान आंदोलन बताया जा रहा है। इसी कारण कीमतें बढ़ी हुई नजर आ रही हैं।
चावल निर्यातक नरेंद्र मिगलानी ने कहा कि तेजी का कारण किसान आंदोलन है। क्योंकि नरेला या दिल्ली, नजफगढ़ की मंडियों में धान नहीं पहुंच पा रहा है। जिस कारण व्यापारियों को जहां धान मिल रहा है, वहीं से खरीद रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई तेजी नहीं है। यह तेजी स्थानीय है। नजफगढ़ में डेढ़ से दो लाख बोरी आ जाती थी।
हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान हंसराज सिंगला ने कहा कि किसान आंदोलन के साथ-साथ चीन द्वारा पहली बार भारत से चावल आयात करने की सूचनाओं के कारण धान की कीमतों में उछाल है।