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निर्यातक द्वारा आढ़तियों के 40 करोड़ रुपये ना देने के मामले में सामाजिक व व्यापारिक बहिष्कार

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rice miler - फोटो : Kaithal
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नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने लेखराज एंड संस फर्म के साथ चल रहे करीब 40 करोड़ रुपये के लेन-देन के मामले में वीरवार को परिवार से जुड़ी पांच फर्मों के सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया है। वहीं इन फर्मों में से जिले के प्रसिद्ध निर्यातक नरेंद्र कुमार ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार देकर पुन: विचार करने की बात कही है।
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विदित रहे कि कैथल की लेखराज एंड संस नामक निर्यातक फर्म का आढ़तियों के करोड़ों रुपये के भुगतान का विवाद चल रहा है। आरोपी फर्म मालिक के भाई नरेंद्र कुमार बड़े निर्यातक हैं। इन निर्यातक से आढ़ती बात करना चाहते थे। लेकिन नरेंद्र कुमार ने उक्त लेन-देन मामले में कुछ भी करने में असमर्थता जता दी। इसके बाद मंडी के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि उक्त परिवार से संबंधित सभी फर्मों का सामाजिक व व्यापारिक बहिष्कार किया जाता है। यह भी निर्णय लिया कि यदि कोई आढ़ती लेखराज परिवार से लेन देन व व्यापारिक संबंध रखेगा तो उसका भी मंडी से बहिष्कार करके 5100 रुपये जुर्माना तथा 21 सदस्यों की कमेटी उसके घर के सामने धरना देगी।
बैठक के निर्णय की जानकारी देते हुए नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि लेखराज परिवार से जुड़ी सभी फर्मों का बहिष्कार किया गया है। यह सही है कि आज के समय में कोई भाई अपने भाई के पैसे नहीं देता, लेकिन निर्यातक फर्म नरेंद्र कुमार ने अपने 40 करोड़ की देनदारी के आरोपी भाई की पूरी मदद की, जबकि आढ़तियों के आगे कुछ भी करने में असमर्थता जता रहे हैं। जिस कारण उक्त निर्यातक सहित सभी भाईयों की फर्मों का का बहिष्कार किया गया है। बैठक में जिला आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी शोरेवाला, रामनिवास मित्तल, जयकिशन मान सहित भारी संख्या में आढ़तियों न भाग लिया।
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फैसले पर फिर से विचार करे एसोसिएशन: निर्यातक नरेंद्र कुमार ने कहा कि यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने हमेशा साफ-सुथरा व्यापार किया है। आज की तिथि में अनाज मंडी में एक भी आढ़ती का रुपया नहीं देना। दूसरी फर्म क्या करती है, कितने रुपये देने हैं। मुझे इस बारे में क्या पता? दूसरे की गलती की सजा उन्हें क्यों? यह समझ से परे है और मंडी में पहले से ही चल रही समस्याओं के बीच यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारी फर्म के साफ-सुथरे काम को देखते हुए उम्मीद है मंडी आढ़ती एसोसिएशन इस फैसले पर फिर से विचार करे और किसी ओर की गलती की सजा किसी अन्य को ना दें।
वहीं अनाज मंडी के ही एक आढ़ती विकास कुमार ने अमर उजाला को बताया कि वे बैठक में नहीं जा पाए, लेकिन मंडी में कुछ लोग रुपये हड़प कर बैठे हैं। उनका बहिष्कार नहीं किया जाता। जबकि जिस नरेंद्र कुमार को अनाज मंडी का एक रुपया नहीं देना, उस सही व्यक्ति का बहिष्कार करना गलत है। उनकी फर्में नरेंद्र कुमार को माल देंगी। वहीं जय रामदास श्रवण कुमार ने कहा कि लेखराज एंड संस के खिलाफ हूं लेकिन पूरे परिवार का बहिष्कार नहीं करना चाहिए।
उधर, हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि भाई की देनदारी के लिए लेखराज नरेंद्र कुमार का बहिष्कार गलत है। गणमान्य लोगों को बैठकर इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह गलत परंपरा की शुरुआत है।
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