नई अनाज मंडी कैथल में धान का सरकारी मूल्य 1888 रुपये का पूरा नहीं मिल पा रहा है। जबकि गुहला-चीका व कई मंडियों में यह 1900 रुपये से भी ऊपर में बिक रहा है। यहां सरेआम राइस मिलर्स 1888 रुपये से कम 1700 से लेकर 1850 रुपये तक मुश्किल ही कीमत बोल रहे हैं। मजबूरन किसान को कम कीमत पर अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। राइस मिलर्स व किसानों के बीच आढ़ती पिसते नजर आ रहे हैं। पूरे मामले में डीसी से लेकर जिले के अन्य अधिकारियों की चुप्पी व अनदेखी भी हैरान कर देने वाली है।
नई अनाज मंडी में पहुंचे किसान सज्जन सिंह ब्राह्मणीवाला ने कहा कि उसकी फसल 1700 रुपये से अधिक में खरीदी ही नहीं जा रही है। जबकि एमएसपी 1888 रुपये प्रति क्विंटल है। जाखौली निवासी सूरजभान का कहना है कि उसे आढ़ती के साथ आए खरीदार ने 1600 रुपये कीमत ऑफर की तो उसने बेचने से इंकार कर दिया। इसी प्रकार से राहड़ा बिलोना निवासी सरदार बीर सिंह ने कहा कि बुधवार को 1740 और वीरवार को 1745 रुपये प्रति क्विंटल जीरी बिकी है। जबकि असली रेट 1888 रुपये बताया जा रहा है। दुमाड़ा निवासी सीबीआई में हेड कांस्टेबल प्रह्लाद ने कहा कि उसे नमी बताकर धान एमएसपी से कम बेचने पर मजबूर किया जा रहा है। लेकिन वे जब तक उसे पूरी कीमत नहीं मिलती, तब तक अपनी धान नहीं बेचेंगे। इसके लिए अधिकारियों से बात की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं।
क्यों बेच रहे हैं किसान कम कीमत पर -किसानों ने कहा कि खरीददार उन्हें आकर 100 से 150 रुपये तक कम ऑफर कर रहे हैं। वे यहां बैठकर ज्यादा दिन इंतजार नहीं कर सकते। इससे उनका गेहूं की बिजाई करने व अन्य फसल संभालने का काम प्रभावित होता है। जिस कारण मजबूरन उन्हें कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है। जब उनसे पूछा गया कि आपके तो खाते में भुगतान होगा तो आप को कम कीमत कैसे मिलेगी? इस पर किसानों ने कहा कि इसके लिए आढ़ती को खरीददार बीच में लेते हैं। वे एमएसपी व खरीदी गई फसल के बीच के अंतर की राशि को आढ़ती से ले लेते हैं और आढ़ती को बाद में जमींदार को देना पड़ता है।
क्या है एमएसपी न देने का कारण- मंडी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि कैथल अनाज मंडी के लिए नियुक्त किए गए मिलर्स की मिलीभगत के कारण ऐसा हो रहा है। वे खरीद के लिए 1700 से लेकर 1850 रुपये से ऊपर भाव लगाते ही नहीं। जिस कारण आढ़ती व किसान मजबूर हैं।
प्रशासन की चुप्पी हैरान करने वाली?
मंडी सूत्रों ने बताया कि पूरा प्रशासन इस बात को जानता है। लेकिन ना जाने क्यों प्रशासन चुप है। डीएफएससी, मार्केट कमेटी सचिव से लेकर जिला प्रशासन के आला अधिकारियों तक की जानकारी में यह बात डाल दी गई है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।
डीएफएससी प्रमोद शर्मा ने कहा कि जब किसान को पूरा एमएसपी उसके खाते में दिया जा रहा है तो कम कीमत पर बिक्री का सवाल ही नहीं। जब उन्हें कहा गया कि आप किसानों से जाकर पूछ लिजिए। एक भी किसान को पूरा एमएसपी नहीं मिल रहा तो डीएफएससी बोले मैं चेक करवाता हूं। मार्केट कमेटी सचिव की भी जिम्मेवारी है कि किसानों को एमएसपी दिलवाए।
हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन के राज्य प्रधान अमरजीत प्रधान छाबड़ा का कहना है कि उनकी जानकारी में ऐसा नहीं है। यदि किसानों को कम कीमत मिल रही है तो पता लगाया जाएगा। यह हो सकता है कि मिलर्स की कैपेसिटी पूरी हो गई है। किसान को एक या दो दिन के लिए इंतजार करना पड़ जाए। लेकिन कम कीमत की जानकारी नहीं है। किसान अपनी धान को सूखा कर लाए। वे पूरी कीमत देने की गारंटी देते हैं।
मार्केट कमेटी सचिव दीपक कुमार से सीधी बातचीत
नई अनाज मंडी में पूरा एमएसपी नहीं मिल रहा, क्या कारण है?
उत्तर-सरकारी एजेंसी द्वारा पूरे एमएसपी पर खरीदा जा रहा है। यदि कोई किसान प्राइवेट एजेंसी को बेचेगा तो उसका कोई इलाज नहीं।
नई अनाज मंडी में एक भी किसान ऐसा नहीं मिला जो कहे कि उसे पूरा एमएसपी मिला है?
उत्तर:-एक भी किसान की शिकायत मार्केट कमेटी कार्यालय में नहीं मिली है, जो कहे कि पूरा एमएसपी नहीं मिला।
प्रश्र- मंडी में पहुंचे दुमाड़ा के सीबीआई में हेडकांस्टेबल प्रह्लाद सिंह ने कहा कि वह मार्केट कमेटी कार्यालय में भी गया था, उसकी कोई सुनवाई नहीं है।
उत्तर:-यदि कोई शिकायत आई है तो कार्रवाई होगी?
प्रश्र- यह कार्रवाई कब होगी?, कागजों से परे ऑफ द रिकॉर्ड किसान लुट रहा है?
उत्तर-ऑन रिकॉर्ड या ऑफ द रिकॉर्ड मुझे नहीं पता, सरकारी एजेंसियों द्वारा पूरे एमएसपी पर खरीद हो रही है।