चावल निर्यात ने पकड़ी रफ्तार, समुद्री भाड़ा 2,000 डॉलर घटा, होर्मुज मार्ग अब भी पूरी तरह सुचारु नहीं
नरेंद्र पंडित
कैथल। पिछले कुछ समय से प्रभावित चावल का अंतरराष्ट्रीय निर्यात दोबारा शुरू होने लगा है। समुद्री मालभाड़े में प्रति कंटेनर 2,000 डॉलर की कमी आने से निर्यातकों को आंशिक राहत मिली है, हालांकि होर्मुज मार्ग अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। सुरक्षा कारणों से मार्ग को बीच-बीच में बंद किए जाने से निर्यात की रफ्तार अभी धीमी बनी हुई है।
कैथल जिले का करीब 80 करोड़ रुपये का चावल, जो विभिन्न बंदरगाहों पर रुका हुआ था, अब धीरे-धीरे निर्यात के लिए रवाना होने लगा है। संकट के दौरान प्रति कंटेनर समुद्री भाड़ा 6,000 डॉलर तक पहुंच गया था, जो अब घटकर 4,000 डॉलर हो गया है। हालांकि, संकट से पहले यही भाड़ा करीब 600 डॉलर प्रति कंटेनर था। ऐसे में मौजूदा लागत अभी भी निर्यातकों पर भारी पड़ रही है।
कैथल के राइस एक्सपोर्टर नरेंद्र मिगलानी ने बताया कि भाड़े में कमी आने से राहत जरूर मिली है, लेकिन मौजूदा दरें पहले के मुकाबले कई गुना अधिक हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है।
हरियाणा की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक देश से 65 लाख मीट्रिक टन चावल का निर्यात हुआ। इसमें हरियाणा की हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत रही।
कैथल, करनाल और आसपास के जिलों से बड़े पैमाने पर प्रीमियम बासमती चावल खाड़ी देशों समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है। ऐसे में होर्मुज जलमार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान प्रदेश के चावल उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है।
सप्लाई चेन अब भी प्रभावित
सन फूड ओवरसीज के संचालक एवं राइस एक्सपोर्टर सुमित गर्ग ने बताया कि होर्मुज मार्ग का बीच-बीच में बंद होना सप्लाई चेन पर असर डाल रहा है।
उनका कहना है कि जब तक यह मार्ग पूरी तरह और स्थायी रूप से सुचारु नहीं हो जाता, तब तक निर्यात अपनी पुरानी रफ्तार नहीं पकड़ पाएगा। वर्तमान में बढ़ी हुई लागत के बीच ही चावल की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हालात सामान्य होने में अभी करीब तीन माह लग सकते हैं।
निर्यात धीरे-धीरे सामान्य हो रहा
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश गोयल ने कहा कि चावल का निर्यात दोबारा शुरू हो गया है और समुद्री भाड़े में भी कमी आई है। बंदरगाहों पर रुका चावल अब संबंधित देशों तक पहुंचने लगा है। उनका कहना है कि आने वाले समय में स्थिति और सामान्य होने की उम्मीद है। साथ ही, निर्यातकों को हुए नुकसान के संबंध में सरकार से सहायता मिलने की भी संभावना है। उन्होंने बताया कि गत वित्त वर्ष में देश के कुल चावल निर्यात में हरियाणा की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत रही।
सुमित गर्ग