संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने और बेटियों के संरक्षण के प्रति समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से बुधवार को सिविल सर्जन कार्यालय कैथल में विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, पंडितों, मौलवियों और ग्रंथियों के साथ
बैठक आयोजित की गई। बैठक में धर्म गुरुओं ने एकजुट होकर कन्या भ्रूण हत्या रोकने और बेटियों के सम्मान व सुरक्षा के लिए समाज को जागरूक करने का संकल्प लिया।
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला, उप सिविल सर्जन डॉ. बलविंद्र गर्ग, जिला नोडल अधिकारी (पीसी-पीएनडीटी) डॉ. सचिन मांडले, उप सिविल सर्जन डॉ. विकास धवन तथा चिकित्सा अधिकारी (पीसी-पीएनडीटी) डॉ. अजय कुमार मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य पीसी-पीएनडीटी एक्ट के प्रति जागरूकता फैलाना और कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथा के खिलाफ सामाजिक सहभागिता बढ़ाना रहा।
सिविल सर्जन डॉ. रेनू चावला ने धर्म गुरुओं से कन्या भ्रूण हत्या जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे पर विचार-विमर्श करते हुए कहा कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान केवल सरकार या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाजसेवियों, धार्मिक संगठनों और जागरूक नागरिकों की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने अपील की कि हर सामाजिक और धार्मिक मंच से बेटियों के संरक्षण और सम्मान का संदेश दिया जाए तथा लोगों को इसके लिए शपथ दिलाई जाए।
बैठक में उपस्थित धर्म गुरुओं ने एक स्वर में कहा कि बेटियों को बचाना और उन्हें आगे बढ़ाना ईश्वर की सबसे बड़ी सेवा है तथा वे अपने-अपने धार्मिक मंचों के माध्यम से समाज को इस दिशा में जागरूक करेंगे।
पीसी-पीएनडीटी एक्ट की दी जानकारी
जिला नोडल अधिकारी (पीसी-पीएनडीटी) डॉ. सचिन मांडले ने धर्म गुरुओं को पीसी-पीएनडीटी एक्ट की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग बताना, पूछना या जांच करवाना पूरी तरह गैरकानूनी है। पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा और 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने यह भी बताया कि दोबारा अपराध करने पर पांच वर्ष तक की सजा, 50 हजार रुपये या उससे अधिक जुर्माना तथा संबंधित चिकित्सक का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि लिंग जांच के लिए दबाव बनाने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है, जिसके तहत पांच वर्ष तक की सजा या एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।