गुहला चीका। बुधवार को 70-80 मजदूर पटियाला रोड की टाइल फैक्ट्री से भरी दोपहरी में डेढ़ हजार किलोमीटर दूर अपने प्रदेश बिहार के लिए निकल पड़े। रास्ते में पुलिस थाना आया, बीडीपीओ दफ्तर आया, मेन चौंक आया, एसडीएम का आवास आया और तहसीलदार की कोठी आई, लेकिन किसी ने भी उन्हें रोकने की जहमत नहीं उठाई। किसी ने पूछा बीमारी है कोरोना, आपको डर नहीं लगता। इस पर बिहार के जिला बेतिया का पंकज बोला कोरोना भूख से तो ज्यादा भयानक नहीं होगी बाबूजी। रात से कुछ नहीं खाया सुबह उम्मीद थी कि शायद प्रशासन की तरफ से कोई अफसर खाने के लिए चार दाने देने पहुंच जाए। दोपहर तक कोई नहीं आया। भूख बर्दाश्त से बाहर हो गई तो पैर अपने आप आप अपने प्रदेश का रास्ता नापने लगे। एक कांधे पर बिस्तर बंद लादे व दूसरे कांधे पर कपड़ों का बैग संभाले मजदूरों काम काफिला पिहोवा रोड की तरफ बढ़ चला। मजदूरों की अगुवाई कर रहे कृष्णा यादव ने बताया कि उसने अपने साथियों की तीन बार रजिस्टेशन करवाई। आधार कार्ड की कॉपी जमा करवाई। प्रशासन से निवेदन किया कि उन्हें सिर्फ जाने की परमिशन भर दे दे। गाड़ी का खर्च वे खुद कर लेंगे। इसके बावजूद बिहार भेजने की व्यवस्था किसी ने नहीं की। एक महीने से इन्हें बहला रहा हूं कि रजिस्ट्रेशन हो गई है। आजकल में परमिशन आ जाएगी।
कहते हैं जो कमाया है उससे खाओ
पश्चिमी चंपारण जिले का रामू बताता है कि प्रशासन और सरकार कहता है कि किसी को भी भूखा नहीं रहने दिया जाएगा। सरकारी लोग बहुत आए, पर जब खाना मुहैया कराने को कहा गया तो बोले कि यहां जो कमाई की है उसी से खाओ। रामू कहता है कि दो महीना हो गया, जो कमाकर जोड़ा था, लॉक डाउन में वह भी खत्म हो गया है। काम अभी चला नहीं है। कमाई कोई हो नहीं रही है। ठेकेदार घर से कितने दिन खिलाएगा। इसलिए यहां भूखों मरने से अच्छा है कि घर पहुंचने की कोशिश करेंगे।
यहां अब क्या रखा है जो वापस आएंगे
यहां वापस आने के सवाल पर सभी मजदूरों का दो टूक जवाब था कि अब यहां क्या रखा है जो वापस आएंगे। उनके साथ यहां बहुत बुरा हुआ है। वापस लौटते मजदूरों ने बताया कि घर वालों से मोबाइल फोन पर तकरीबन रोज बात होती है कभी फोन हम करते हैं कभी वहां से आ जाता है। एक दूसरे की आवाज निकलते ही रुलाई फूट पड़ती है। वहां मां-बाप रोते हैं उन्हें डर है कि उनके बच्चे हरियाणा में पता नहीं कैसे होंगे।
प्रवासी मजदूरों की मदद की जाएगी
एसडीएम गुहला शशी वसुंधरा ने कहा कि मजदूरों के पलायन का मामला उनके नोटिस में नहीं है। वे तहसीलदार और बीडीपीओ को भेजकर पता करवाएंगी कि मजदूर इस वक्त कहां हैं। प्रवासी मजदूरों की हर तरह से मदद की जाएगी। प्रशासन की ओर से सहायता लगातार की जा रही है।