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Kaithal News: आरबीएसके बन रहा जरूरतमंद बच्चों के लिए वरदान

Fri, 19 Sep 2025 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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अंबर केसरवानी
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कैथल। सरकार की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) स्कीम चलाई जा रही है जो कि जरूरतमंद बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसका उद्देश्य जन्म से 18 साल के बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाना है। पिछले एक साल में जिले मेंं इस स्कीम के अंतर्गत दिल में छेद संबंधी बीमारी सहित कुल 86 सर्जरियां हो चुकी हैं। सरकारी स्कूल के जरूरतमंद बच्चों को पिछले एक साल में 1000 चश्में टीम की ओर से बांटे जा चुके हैं।

आरबीएसके यानी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्म दोष, रोग, कमियां और विकास में देरी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और निःशुल्क उपचार किया जाता है। वहीं, आरकेएसके यानी राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम में 10-19 वर्ष के किशोरों में पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, चोट, हिंसा और मादक द्रव्यों के सेवन जैसी विभिन्न स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटा जाता है।
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जिले में कुल 11 टीमें कर रही हैं कार्य

जिले में स्कीम के तहत कुल 11 टीमें कार्य कर रही हैं। प्रत्येक टीम में एक मेल और एक फीमेल चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और एक एएनएम वर्कर शामिल हैं।

स्कूल में जाकर टीमें करती हैं बच्चों की स्क्रीनिंग
सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए जिले की 11 टीमों में शामिल कर्मचारी बच्चों की स्क्रीनिंग करते हैं। इससे बच्चों में एनीमिया व अन्य बीमारियों का पता लगता है और जिन बच्चों में सामान्य बीमारियां पाई जाती हैं उन्हें पीएचसी में रेफर किया जाता है। इसके अलावा जिन बच्चों में गंभीर बीमारियों के लक्षण पाए जाते हैं उन्हें बड़े अस्पताल में रेफर किया जाता है।
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इन बीमारियों का होता है मुफ्त इलाज
1 न्यूरल ट्यूब दोष

2 डाउन सिंड्रोम
3 होंट एवं तालू की विक्रति
4 पैर की विक्रति
5 कूल्हों के विकास संबंधी विकार
6 जन्मजात मोतियाबिंद
7 जन्मजात बधिरता
8 जन्मजात हृदय रोग
9 जन्मजात रेटिना संबंधी विकार
10 सीवियर एनीमिया



सरकार की ओर से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के माध्यम से जिले के सभी जरूरतमंद परिवार के बच्चों को नि:शुल्क सर्जरी और इलाज दिया जा रहा है। जिले में 11 टीमें इस स्कीम के तहत कार्य कर रही हैं। अब तक दिल की बीमारी की 31, तालू की छह सर्जरी, भैंगेपन की दो और पैरों के टेढ़ेपन की 31 सर्जरियां इस स्कीम के तहत विभाग की ओर से करवाई जा चुकी हैं। जिले में अब तक माइल्ड एनीमिया के 1436 केस, मॉड्रेट एनीमिया के 1108 केस और सीवियर एनीमिया के 76 केस आ चुके हैं।
- विकास धवन, उप सिविल सर्जन, कैथल
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