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आरबीआई के आदेशों से भी नहीं हो रहा किसानों को कोई लाभ

Thu, 24 Nov 2016 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कैथल
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आरबीआई की छूट के बावजूद किसानों को को-ऑपरेटिव बैंकों से कोई मदद नहीं मिल पा रही है। हालांकि बीज बिक्री केंद्रों से किसान पुराने नोटों पर बीज जरूर खरीद रहे हैं। लेकिन बिक्री केंद्रों द्वारा आगे ये नोट को-ऑपरेटिव बैंकों में जमा नहीं करवाए जा सकते। इसके अलावा को-ऑपरेटिव बैंकों को पुराने नोट लेने से मनाही और चालू खाते से 50 हजार रुपये तक की निकासी के कारण भी किसानों को रबी की फसल के लिए बैंक अग्रिम भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। बैंक अधिकारियों ने सरकार को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है।
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नोटबंदी के बीच सरकार ने किसानों की मदद के लिए उन्हें अग्रिम लोन देने के लिए सहकारी बैंकों को निर्देश दिए हैं। आरबीआई ने भी इस बारे में निर्देश जारी किए हैं। वहीं नाबार्ड ने 21 हजार करोड़ रुपये बैंकों को देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुराने नोट से खाद व बीज देने के निर्देश जिलास्तर पर पहुंच गए हैं। लेकिन इनका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिसमें निम्र परेशानियां आ रही हैं।

पेक्सों के को-ऑपरेटिव बैंक में चालू खातों से नहीं हो पा रही निकासी
जिले के सभी किसानों व अन्य त्रणियों को को-ऑपरेटिव बैंक से 31 पेक्स के माध्यम से जोड़ा गया है। इन 31 पेक्स का जिलास्तरीय बैंक में चालू खाते हैं। लेकिन चालू खाते से केवल 50 हजार रुपये तक निकाले जा सकते हैं। जबकि एक पेक्स में सैकड़ों किसान ऋणी हैं। उन्हें 50 हजार रुपये में से किस-किस को ऋण दिया जा सकेगा।
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पुराने नोट के रूप में कर्ज जमा ना होने से पेक्स नहीं दे पा रहे एडवांस लोन
सरकार ने को-ऑपरेटिव बैंकों को पुराने नोट के रुप में कर्ज वसूली से इंकार किया है। जबकि किसानों के पास इस समय फसल बेचने के बाद अधिकतर पुराने नोट हैं। नई करेंसी मार्केट में ही नहीं है तो किसान नई करेंसी के तौर पर बैंकों में अपना पिछली फसल का कर्ज कैसे जमा करवाएंगे। जब तक पिछली फसल का कर्ज जमा नहीं होगा, तब तक पेक्स किसानों को अगला ऋण कैसे देंगे? इस प्रश्न का किसी को जवाब नहीं मिल पा रहा है।

बिक्री केंद्रों पर आने वाले पुराने नोटों का क्या होगा?
सरकारी को-ऑपरेटिव खाद व बीज बिक्री केंद्रों पर सरकार ने किसानों से पुराने नोट में बीज व खाद देने के निर्देश जारी कर दिए हैं। लेकिन जब बिक्री केंद्र पर तैनात कर्मचारी को-ऑपरेटिव बैंक में पुराने नोट जमा नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में बिक्री केंद्र व बैंक कर्मियों के लिए यह फैसला भी गले की फांस बना हुआ है।

पुराने नोट स्वीकार न किए जाने के कारण खाली बैठे हैं बैंककर्मी
अन्य सभी बैंकों में जहां इस समय लेन-देन को लेकर मारामारी चल रही है। वहीं को-ऑपरेटिव बैंक कर्मचारी खाली बैठे हैं। नई करेंसी अभी आई नहीं है। पुरानी जमा करवा नहीं सकते। इसलिए यहां किसान भी इक्का-दुक्का ही पहुंच रहे हैं। बैंक कर्मियों ने कहा कि अन्य बैंकों को छूट देकर और को-ऑपरेटिव बैंक पर पुराने नोट लेने की बंदिश लगाकर सरकार ने एक तरह से को-ऑपरेटिव बैंकों की साख को भी नुकसान पहुंचाया है।

दूसरी ओर किसान रामकुमार ने कहा कि आढ़ती ने धान की फसल बिक्री पर उसे पुराने नोटों के रूप में भुगतान किया है। उसे पिछली फसल का कर्ज जमा करवाना था। बैंक कर्मचारी ले नहीं रहे। वे नई करेंसी मांग रहे हैं। अब नई करेंसी कहां से लेकर आऊं। जब नई करेंसी आएगी, तभी वह कर्ज दे सकेगा। तब तक वह बैंक से अगली फसल के लिए कर्ज कैसे लेगा? यह भी समझ नहीं आ रहा।

कैथल को-ऑपरेटिव बैंक के महाप्रबंधक रमेश पूनिया ने कहा कि 50 हजार से अधिक की निकासी, बैंक में कर्ज वसूली में पुराने नोट को स्वीकार ना किए जाने के कारण किसानों को एडवांस भुगतान नहीं हो सकता। इसलिए सरकार को इस बारे में लिखा गया है कि मार्गदर्शन किया जाए। ताकि आरबीआई की छूट अनुसार काम किया जा सके।
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