कैथल। गर्मी का मौसम शुरू होने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग मलेरिया व डेंगू को लेकर सतर्क हो गया है। मलेरिया व डेंगू से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अब रैपिड रिस्पांस टीमें बनाई हैं। इसके तहत जिले के सभी 277 गावों के लिए 284 टीमें बनाई गई है। यह टीमें घर-घर पहुंचकर बुखार को लेकर जानकारी प्राप्त करेगी।
इसके साथ ही जिले के 577 तालाबों में गंबूजिया मछलियां डाली गई है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बनाई गई टीम में आशा वर्कर, एएनएम और एक अन्य स्वास्थ्य कर्मी शामिल है। अब जिले में प्रतिदिन मलेरिया की रैपिड रिस्पांस टीमें मलेरिया को लेकर जांच कर रही है। गौरतलब है कि कैथल जिले में पिछले पांच साल से कोई भी केस नहीं है। इस कारण जिला वर्ष 2017 से मलेरिया मुक्त है।
इस संबंध में मलेरिया के नोडल अधिकारी व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नीरज मंगला ने बताया कि मलेरिया व डेंगू से बचाव को लेकर तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई है। इसके तहत जिले में सभी 277 गावों में 284 टीमें बनाई गई हैं। यह टीमें रैपिड रिस्पांस टीम हैं। जो डोर-टू-डोर सर्वे करके बुखार को लेकर जांच कर रही है।
मलेरिया वर्ष 2014 से अब तक
वर्ष
मलेरिया केस
2014
45
2015
25
2016
16
2017
09
2018
03
2019
00
2020
00
2021
00
2022
00
2023
00 अभी तक
यह है मलेरिया
मलेरिया एक मच्छरों द्वारा फैलाया गया खतरनाक रोग है। यह प्लासमोडियम नामक पैरासाइट से उत्पादित होता है। मच्छरों से आदमी तक आने के लिए एक एनोफेलीज मच्छर का काटना ही काफी होता है। काटे गये इंसान के खून में जा कर यह पैरासाइट बढऩे लगता है। यह शरीर के रेड ब्लड सेल्स को नष्ट करने लगता है।