कड़ाके की ठंड में गरीब को सिर ढांपने के लिए शहर में कोई सहारा नहीं है। शहर में खानापूर्ति के लिए एक रैन बसेरा बनाया गया है। वह भी बंद पड़ा हुआ है। यह रैन बसेरा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन से करीब पांच किलोमीटर दूर है। जरूरत पड़ जाए तो लोगों को बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के आस-पास फुटपाथ पर ही रात बितानी पड़ती है।
बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन से करीब पांच किलोमीटर दूर
शहर में सिरटा रोड पर महर्षि वाल्मीकि सामुदायिक केंद्र में रैन बसेरा जहां बनाया हुआ है। जो बस अड्डे से करीब पांच किलोमीटर से भी ज्यादा दूर पड़ता है। वहीं रेलवे स्टेशन से भी करीब-करीब इतनी ही दूरी बनती है। यहां यदि रात को किसी व्यक्ति को रैन बसेरे की जरूरत भी पड़ जाए तो ढूंढने पर भी उसे रैन बसेरा नहीं मिलेगा।
बस अड्डे व रेलवे स्टेशन पर नहीं हैं सूचक बोर्ड
बस अड्डे व रेलवे स्टेशन पर भी रैन बसेरे के लिए कोई सूचक बोर्ड नहीं है। ना ही महर्षि वाल्मीकि सामुदायिक सेंटर के बाहर कोई ऐसा बोर्ड लगा है कि यहां जरूरत पड़ने पर लोग रात्रि में आश्रय ले सकें।
बस अड्डे के बाहर ही करना पड़ता है इंतजार तो रेलवे स्टेशन पर कुर्सियों पर कटती है रात
रात को बसों के रुकने के बाद बस अड्डे को भी प्रवेश द्वार बंद करके बंद कर दिया जाता है। वहीं रेलवे स्टेशन पर भी गाड़ियों के आवागमन तक तो लोग कुर्सियों पर ही रात बिता लेते हैं। इसके बाद उन्हें आस-पास फुटपाथों पर ही रात बितानी पड़ती है। क्योंकि जो रैन बसेरा बनाया गया है वह भी पिछले करीब चार महीनों से खुला ही नहीं है।
रैन बसेरे में एक व्यक्ति की ड्यूटी लगा दी गई है। साथ ही बिस्तरों व पेयजल के अलावा शौचालय की भी सुविधा दुरुस्त करवाई जा रही है।
राजकुमार शर्मा, एमई, नगर परिषद, कैथल।
रैन बसेरा भवन में जो भी समस्याएं हैं। उन्हें दूर करवाकर इसे शुरू करवाया जाएगा।
संजय जून, डीसी कैथल।