कुरुक्षेत्र लोकसभा से सांसद राजकुमार सैनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने जाट समाज के नेताओं को आरक्षण देने का जो भी वादा किया था, वह अवैध था। माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ऊपर जाकर आरक्षण देने जैसी कोई पावर सरकार के पास नहीं होती। सैनी मंगलवार को लोक निर्माण विभाग विश्रामगृह में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जिन जातियों को आरक्षण देने की संबंधित आयोग ने सिफारिश नहीं की, अगर उस जाति को जबरदस्ती जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, वह गलत होगा। विशेष जाति को आरक्षण देने के प्रस्ताव को जब सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया तो सरकार के पास इसका कोई औचित्य नहीं बनता। सांसद ने यह भी कहा कि यदि किसी जाति में लोग अपनी आरक्षण संबंधी घोषणाओं को पूरा करवाने के लिए कोर्ट की भी अनदेखी करते हैं तो यह लोकतंत्र पर एक सीधा प्रहार होगा। सांसद ने कहा कि वे अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी मांग है कि यदि आरक्षण देना है तो इसे शत-प्रतिशत कर दिया जाए। जिस जाति की जितनी जनसंख्या है, उस जाति को उसी हिसाब से आरक्षण दे दिया जाए। इसके बाद किसी के हितों की अनदेखी नहीं हो पाएगी।
जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा 29 जनवरी को आहूत आंदोलन पर सांसद ने कहा कि यदि कोई प्रदेश के हालात बिगाड़ेगा तो उसके लिए वही जिम्मेवार होगा। उन्होंने अपने 5 सूत्रीय फार्मूलों मेें 100 प्रतिशत आरक्षण करने, मनरेगा को किसानों से जोड़ने, एक परिवार-एक रोजगार, राज्यसभा को खत्म करने, हम दो व हमारे दो की नीति लागू करने की बात फिर दोहराई। राजकुमार सैनी ने विश्रामगृह में आयोजित अपने कार्यालय में सावित्री बाई फूले के जन्मदिवस पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर सुरेश गर्ग नौच, राजीव राणा, धर्मबीर सैनी, अनिल सैनी, कपिल सिरोही, सत्यवान कश्यप, मांगे राम रेहड़िया, टेकचंद, कुमारी संगीता, दरबारा डोहर, राकेश आर्य, रामनाथ सैनी आदि मौजूद रहे।