ढांड। हाईकोर्ट के आदेशों पर खेड़ी रायवाली गांव में पंचायती जमीन पर बने अवैध मकानों को गिराए जाने के प्रशासनिक नोटिस के बाद से ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। शुक्रवार को उनके मकान गिराए जाने थे तो आशियाना बचाने के लिए उन्होंने लाठियां लेकर मोर्चा संभाल लिया। गनीमत रही कि फोर्स न मिलने से प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई स्थगित कर दी और इस प्रकार यह टकराव फिलहाल टल गया।
गौरतलब है कि प्रशासन ने 21 जुलाई को खेड़ी रायवाली में अवैध मकानों को गिराए जाने का नोटिस भेजा था। इस मुद्दे पर लामबंद हुए ग्रामीणों ने आसपास के गांवों से सहायता मांगी थी। प्रशासन ने 21 जुलाई को सुबह 11 बजे ध्वस्तीकरण का समय निर्धारित किया था। सूचना पर समय से पहले ग्रामीण गांव के बाहर मंदिर में एकत्रित होना शुरू हो गए। देखते ही देखते पूरा गांव मंदिर परिसर में एकत्रित हो गया और सहायता के लिए आसपास के गांवों से भी सैकड़ों की संख्या में युवा व बुजुर्ग मंदिर में पहुंच गए। ग्रामीणों की संख्या एक हजार से ज्यादा थी।
टकराव की कोई स्थिति बनती लेकिन प्रशासन की ओर से कार्रवाई के लिए कोई नहीं पहुंचा। दोपहर एक बजे तक गहमागहमी का माहौल रहा। इस प्रकार टकराव की यह स्थिति टल गई। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सतबीर भाणा, भाग सिंह खनौदा, दर्शन खनौदा, सतपाल सरपंच साकरा, विकास तंवर भी खेड़ी रायवाली के ग्रामीणों के समर्थन में पहुंचे थे।
नाराज ग्रामीणों का कहना था कि पहले तो प्रशासन के साथ हम भाईचारे से सहमति का रास्ता अपनाने की बात करेंगे। यदि प्रशासन उनके साथ सहमति होता है तो अच्छी बात है शांति बनी रहेगी। साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने उनकी बात नही मानी और उनके आशियाने उजाडऩे का काम किया तो हम मर मिटने के लिए तैयार बैठे है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब हमारे घर ही तोड़ दिए जाएंगे तो हम यहां क्या करेंगे। उन्होंने कहा कि ये मकान आज ही नहीं बने है। उनकी तीन पीढि़यों ने इन्हीं मकानों में जीवन व्यतीत किए है। प्रशासन शांति बनाए रखना चाहता है और हमें बसे बसाए रखना चाहता है तो कलेक्टर रेट के हिसाब से वैल्यू लगा दे हम अदा करने को तैयार है।
सभी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि प्रशासन ने यदि सख्ती करता है तो किसी भी प्रकार की घटना के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होगा। दूसरी ओर कांग्रेसी नेता सतबीर भाणा ने ग्रामीणों से अपील की कि वे शांति बनाए रखें। इसके बाद ग्रामीणों ने मंदिर परिसर से निकल कर ढांड रोड पर प्रशासन एवं सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी भी की।
महिलाओं ने भी संभाला था मोर्चा
अपने घर का काम काज कर महिलाओं ने भी अपने आशियाने बचाने के लिए सुबह के समय से ही मंदिर में पहुंच कर मोर्चा संभाला हुआ था। अंगूरी देवी, ईशरो, निका, दर्शो, शकुंतला, माया देवी, विद्या देवी, रीमा देवी, नीता देवी, नीलम देवी, पूनम रानी, कांता देवी ने कहा कि हम चाहते है कि गांव में शांति बनी रहे। शांति बनाए रखना प्रशासन के हाथ में है। यदि प्रशासन बुलडोजर लेकर आने की बजाए बातचीत के लिए गांव में आए और ग्रामीणों के साथ बातचीत करे। हम उसके लिए तैयार है। बातचीत का मतलब हमारे मकान किसी भी सूरत में प्रशासन गिराने की कोशिश ना करे। हम प्रशासन के साथ टकराव नहीं चाहते। मकान कैसे बच सकते है यह रास्ता निकाल कर प्रशासन गांव में आए हम उनका स्वागत करेंगे। यदि मकान गिराने के लिए आए तो हम ऐसा कभी भी नही होने देंगे। अब यह प्रशासन को सोचना है कि गांव में शांति चाहते है या खून खराबा।
उधर, सरपंच शमशेर का कहना है कि मुझे ग्रामीणों ने पांच वर्ष के लिए चुना है। पांच वर्ष तक ग्रामीणों के हर सुख दुख मेें वे उनके साथ खड़े हैं। उनकी प्रशासन से अपील है कि कलेक्टर रेट के हिसाब से ग्रामीणों से पैसा जमा करवा लिया जाए। जिससे गांव बसा रहे। गांव में लगभग 200 घर है। 80 के आसपास घरों को गिराने की तलवार लटकी हुई है। अगर ऐसा हुआ तो गांव ही उजड़ जाएगा।
दूसरी ओर ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार ढांड गौरव शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट एवं एसडीएम कोर्ट के आदेशों के पालन में खेड़ी रायवाली में पंचायती जमीन पर बने अवैध कब्जों को हटाने के लिए जाना था, लेकिन पुलिस फोर्स नहीं मिलने से कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा। आगामी कार्रवाई के लिए सूचना उच्चधिकारियों को दे दी गई है।