कैथल। जिला परिषद में जजपा-भाजपा गठबंधन में अभी तक सहमति से कार्य नहीं हो पा रहा है। दोनों ही पार्टियों के पार्षदों में कभी सहमति बनती है तो कभी तकरार होती है। इससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं।
एक साल में जिला परिषद में हाउस की तीन बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इसमें अब तक केवल दूसरी बैठक में जिप के साढ़े छह करोड़ रुपये की ग्रांट वितरण पर सहमति बन पाई थी। पहली और तीसरी बैठक में दोनों ही पार्टियों के समर्थित पार्षद आमने-सामने नजर आए।
शुक्रवार को हुई जिला परिषद की सदन की तीसरी बैठक में तकरार दिखी। अब बड़ा सवाल यह भी है कि पूरे पांच साल तक कैसे यह गठबंधन का धर्म निभ पाएगा। सदन की बैठक को लेकर हुए घटनाक्रम में भाजपा समर्थित पार्षदों ने जिप के अध्यक्ष दीप मलिक जाखौली पर उनकी कोई सुनवाई न करने के आरोप लगाए हैं। वहीं, जिप अध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने सभी पार्षदों की बैठक में बात सुनी है, जो विकास कार्याें का प्रस्ताव लेकर आए उन्हें एजेंडे में शामिल किया है।
फरवरी में आयोजित हुई पहली बैठक में हुआ था यह ः जिप में गठबंधन सरकार में दोनों पार्टियों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनाने पर सहमति हुई थी। इसके बाद सात फरवरी को आयोजित पहली बैठक में जननायक जनता पार्टी के अध्यक्ष दीप मलिक जाखौली को बड़ा झटका लगा था। भाजपा के उपाध्यक्ष कर्मबीर कौल ने छह करोड़ 55 लाख रुपये की ग्रांट बांटने का बहुमत से अधिकार प्राप्त कर लिया।
चुनाव के बाद हुई पहली ही बैठक में भाजपा ने जजपा को गठबंधन में होते हुए गच्चा दिया था और 15 वोट हासिल कर ग्रांट वितरण के अधिकार पर 11 वोटों के मुकाबले चार वोट से पराजित कर दिया था। उस समय जिप अध्यक्ष दीप मलिक जाखौली ने भाजपा पर जोड़-तोड़ की राजनीति करने का आरोप लगाया था।
मार्च में आयोजित हुई पहली बैठक में हुआ था यह ः फरवरी के बाद 31 मार्च को दूसरी बैठक आयोजित हुई थी। इस बैठक में उपाध्यक्ष कर्मबीर को दोनों पार्टियों के समर्थित पार्षदों ने आपसी सहमति से वित्तीय शक्तियां दी थी। इसके बाद उपाध्यक्ष ने पहली बैठक में हुए विवाद को सुलझाने का तर्क रखा था। इस बैठक में पारित प्रस्ताव के बाद साढ़े छह करोड़ की ग्रांट को आपसी सहमति से प्रत्येक वार्ड के हिसाब से खर्च करने का फैसला लिया था। जिप अध्यक्ष ने मनमुटाव न होने की बात स्वीकारी थी। अब तीसरी बैठक में फिर से दोनों पार्टियों के समर्थित पार्षद आमने-सामने आए हैं। संवाद