संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता के दिशा-निर्देशों के तहत खंड के खेड़ी लांबा गांव में जल आपूर्ति प्रणाली, जल गुणवत्ता जांच और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिला सलाहकार दीपक कुमार ने ग्रामीणों को पानी संकट और उसके समाधान के उपायों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि यदि गांव स्तर पर वर्षा जल संचयन की पहल की जाए तो पानी के संकट को काफी हद तक टाला जा सकता है।
उन्होंने बताया कि भारत में औसतन 1500 मिमी वर्षा होती है, लेकिन इसका मात्र 35 प्रतिशत ही संरक्षित किया जाता है। इसी वजह से वर्षा का पानी बेकार हो जाता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने घरों, खेतों और सार्वजनिक स्थलों पर छोटे स्तर पर जल संचयन करें ताकि भविष्य में जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। रसायनज्ञ सुभाष चंद्र ने ग्रामीणों को जल गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया समझाई और मौके पर ही अवशिष्ट क्लोरीन का परीक्षण कर 0.2 से 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर की सुरक्षित सीमा के महत्व को बताया।
उन्होंने ग्रामीणों को सलाह दी कि पानी को उबालकर या छानकर ही सेवन करें ताकि जलजनित बीमारियों से बचा जा सके। इस अवसर पर उपमंडल अभियंता नरेश कुमार, रसायनज्ञ सुभाष चंद्र, जिला सलाहकार दीपक कुमार, कनिष्ठ अभियंता रवि पूनिया और ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर चंद्रशेखर उपस्थित रहे।
शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर
ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर चंद्रशेखर ने ग्रामीणों को विभाग की टोल फ्री हेल्पलाइन 1800-180-5678 की जानकारी दी और बताया कि इस नंबर पर जल आपूर्ति, गुणवत्ता, लीकेज अथवा अन्य समस्याओं के संबंध में शिकायत दर्ज की जा सकती है।
गांव के सरपंच सोनू राम की अध्यक्षता में ग्राम जल एवं सीवरेज समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें समिति के सदस्य शमशेर सिंह, मनीष शर्मा, मनोज नंबरदार, रेखा सुदेश और मीनाक्षी विशेष रूप से मौजूद रहे। उपमंडल अभियंता नरेश कुमार ने ‘जल है तो कल है’ के महत्व को रेखांकित करते हुए जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। कनिष्ठ अभियंता रवि पूनिया ने गांव में अवैध और अस्वच्छ जल कनेक्शनों की पहचान की और उनके हटाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के कनेक्शन जल आपूर्ति प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिससे संपूर्ण गांव प्रभावित होता है।