मौसम ने इस बार गेहूं उत्पादन में किसानों का पूरा साथ दिया है। अब तक मौसम की अनुकूलता के चलते गेहूं की बंपर फसल होने का अनुमान है। कृषि वैज्ञानिक करीब 10 प्रतिशत तक ज्यादा उत्पादन का अनुमान लगा रहे हैं। हालांकि अगले सप्ताह 4 से 6 अप्रैल तक बारिश की संभावनाएं हैं। यदि इस पश्चिमी विक्षोभ में ज्यादा बारिश नहीं होती है तो किसानों के साथ-साथ खाद्यान्न की दृष्टि से प्रदेश की बल्ले-बल्ले होने वाली है।
रबी के मौसम में इस बार मौसम गेहूं की फसल के पूरी तरह से अनुकूल रहा। ऐसा मौसम वर्ष 2012 में था। उस समय प्रति एकड़ 55 से 60 मन गेहूं का उत्पादन हुआ था। यानि की एक हेक्टेयर में 20 क्विंटल से ज्यादा। इसके बाद से कई बार ऐसे मौसम आए कि गेहूं की पकी हुई फसल किसानों के हाथ से फिसल गई। वर्ष 2015 में सीजन के समय बारिश से फसल को इतना नुकसान हुआ था कि सरकार को 90 प्रतिशत तक डिस्कलर गेहूं को खरीदने का आदेश जारी करना पड़ा था। लेकिन इस बार पूरे सीजन में जब भी बारिश हुई, उसी समय गेहूं की फसल को जरूरत थी और इसने गेहूं के लिए घी का काम किया। वहीं मार्च माह के अंतिम सप्ताह तक ठंडे रहे मौसम का पूरा असर रहा। गेहूं की फसल को पकने में पूरा समय मिला और इसमें दाना बनने का पूरा समय था। हालांकि अंतिम सप्ताह में बढ़ गए पारे के कारण एकदम से फसल पक गई है। फिर भी इसका ज्यादा नुकसान कृषि वैज्ञानिक नहीं मान रहे हैं।
पिछले साल प्रदेश में 25.78 लाख हेक्टेयर में गेहूं का उत्पादन हुआ था। जिसमें 44.07 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के औसत उत्पादन के हिसाब से 1 करोड़ 13 लाख 58 हजार एमटी गेहूं का उत्पादन हुआ था। इस बार इसमें 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का अनुमान है। इस तरह से इस बार प्रदेश में गेहूं का उत्पादन 1 करोड़ 20 लाख एमटी से ज्यादा हो सकता है।
4 से 6 अप्रैल को हो सकती है हलकी बारिश
उत्तरी क्षेत्र में चंडीगढ़ स्थित मौसम विज्ञान केंद्र में विशेषज्ञ डा. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि 4, 5 व 6 अप्रैल को हलकी बारिश की संभावनाएं हैं। यदि इस दौरान तेज हवाओं व ओले भी पड़े तो नुकसान हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिक डा. चंद्रशेखर डागर के अनुसार इस बार अंतिम दिनों तक मौसम गेहूं के अनुकूल रहा है। जिसके कारण गेहूं उत्पादन बढ़ सकता है। लेकिन गेहूं के सीजन में जो भी बरसात होती है, उसमें ओलावृष्टि की संभावना रहती है। अगले सप्ताह ज्यादा बरसात नहीं हुई तो निश्चित तौर पर इस बार बंपर पैदावार होगी। 4 से 6 अप्रैल तक हलकी एवं उत्तरी जिलों में ही बारिश की संभावनाएं हैं।
कृषि वैज्ञानिक एवं कैथल कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक रहे डा. राजेंद्र सिंह श्योकंद के अनुसार इस बार गेहूं का कम से कम 10 प्रतिशत तक ज्यादा उत्पादन होगा। क्योंकि मौसम ने किसानों का पूरा साथ दिया है। बस पकी हुई फसल की कटाई एवं भंडारण सुरक्षित हो जाए।