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जिले में 26 हजार हेक्टेयर में हुआ नुकसान

Wed, 16 Mar 2016 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कैथल।
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कैथ्‍ाल - फोटो : अमर उजाला
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पिछले सप्ताह तीन दिनों तक चली बरसात एवं ओलावृष्टि के कारण जिले में 26 हजार हेक्टेयर में खड़ी गेहूं व सरसों की फसल में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। कृषि विभाग ने इस नुकसान का आंकलन कर रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। सरकार ने नुकसान का आंकलन करते हुए रिपोर्ट मांगी थी। एक लाख 60 हजार हेक्टेयर में से इस 26 हजार हेक्टेयर में किसानों का कई जगह तो 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। जिस कारण पूरे जिले में तीन दिनों में किसानों को करोड़ों रुपये का फटका लगा है।
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विदित रहे कि जिले में शुक्रवार से शुरू हुई बरसात के बाद सोमवार सुबह तक अलग-अलग जगहों पर बरसात व ओलावृष्टि जारी रही। ओलावृष्टि के कारण गुहला के कई गांवों में सर्वाधिक नुकसान हुआ है। इसके अलावा तेज बरसात व अंधड़ में कई जगह फसल जमीन पर बिछ गई। हालांकि सोमवार व मंगलवार को धूप खिलने पर इस नुकसान में कुछ कमी आ सकती है। लेकिन जो फसल धूप निकलने के बावजूद खड़ा नहीं हो सकी, वहां नुकसान निश्चित है।
सरकार ने कृषि विभाग के माध्यम से इस बरसात से हुए नुकसान का आंकलन करते हुए रिपोर्ट मांगी थी। जिसके तहत जिले में एक लाख 60 हजार हेक्टेयर में बोई गई गेहूं व 4 से 5 हजार हेक्टेयर में बोई गई सरसों की फसल में नुकसान का आंकलन किया गया।
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20 हजार हेक्टेयर में 25 प्रतिशत तक नुकसान
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 20 हजार हेक्टेयर ऐसा एरिया है। जहां इस मौसम के कारण 0 से 25 प्रतिशत तक नुकसान होने का अनुमान है। इसके अलावा 6 हजार 20 हेक्टेयर ऐसा एरिया है, जिसमें 26 से 50 प्रतिशत तक नुकसान होने का अनुमान है।

करोड़ों में बनती है इस नुकसान की कीमत
जिले में एक लाख 60 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई गई है। जिसमें प्रति हेक्टेयर 45 क्विंटल गेहूं का उत्पादन होता है। यदि इसमें से 26 हजार हेक्टेयर में 25 प्रतिशत तक भी नुकसान का आंकलन किया जाए तो करीब 22 लाख 50 हजार क्विंटल गेहूं के कम होने का अनुमान है। जिसकी कीमत करोड़ों रुपये बनती है। इसी तरह सरसों में भी किसानों को भारी फटका लगने का अनुमान है।

किसान राजेश कुमार, महेंद्र सिंह ने बताया कि जिन इलाकों में गेहूं में सिंचाई की हुई थी, उन इलाकों में गेहूं की फसल के जमीन पर बिछ जाने के कारण ज्यादा नुकसान होगा। क्योंकि जड़ों में कमी आने के बाद पौधे को उपयुक्त खुराक नहीं मिलती, जिससे दाना नहीं बन पाता। उसका असर उत्पादन पर होता है।

कृषि उप-निदेशक डा. महावीर सिंह ने कहा कि जिले में 20 हजार हेक्टेयर में 25 प्रतिशत तक और 6 हजार हेक्टेयर में 26 से 50 प्रतिशत नुकसान का आंकलन किया गया है। इस संबंध में विभाग को रिपोर्ट भेज दी गई है।

इस समय बरसात के कारण उस फसल में नुकसान हो सकता है। जो जमीन पर बिछ गई है। ओलावृष्टि के कारण काफी एरिया में बालियां टूट जाने से उत्पादन पर निश्चित तौर पर असर पड़ेगा। धुप निकलने से जमीन पर गिर गई फसल में कुछ राहत मिलन सकती है।
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डा. रमेश वर्मा, कृषि वैज्ञानिक
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