संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती मांग के बीच पंप संचालकों ने एक वाहन को सीमित मात्रा में ईंधन देने का निर्णय लिया है। अब एक वाहन को अधिकतम 50 लीटर पेट्रोल और 190 लीटर तक ही डीजल दिया जाएगा। यह कदम कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए उठाया गया है।
पंप संचालक अरुण ने बताया कि यह निर्णय कंपनी और सरकार के निर्देशानुसार लिया गया है। फसल सीजन की शुरुआत के चलते ईंधन की मांग पहले से ही बढ़ गई है, ऐसे में व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह सीमा तय की गई है।
इधर, गैस एजेंसियों के बाहर भी लंबी कतारें लगी हुई हैं। लोग सुबह से ही सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े हैं। वहीं होटल और ढाबों पर कमर्शियल सिलेंडरों का अधिक उपयोग होने से घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डीजल की आपूर्ति बढ़ी : डीसी अपराजिता ने स्पष्ट किया कि जिले में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि फरवरी माह में जहां 72 लाख लीटर डीजल की आपूर्ति हुई थी, वहीं मार्च में यह बढ़कर करीब डेढ़ करोड़ लीटर हो गई है।
इसी प्रकार पेट्रोल की बिक्री फरवरी में 43 लाख लीटर थी, जो मार्च में बढ़कर 57 लाख लीटर पहुंच गई। एलपीजी गैस के करीब 6500 सिलेंडर प्रतिदिन वितरित किए जा रहे हैं और लगभग 5000 सिलेंडर का स्टॉक उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडरों का वितरण निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा रहा है। यदि कोई कालाबाजारी करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब तक एक एफआईआर दर्ज कर 15 सिलेंडर जब्त किए जा चुके हैं।
डीसी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ईंधन और गैस वितरण पर लगातार निगरानी रखें और प्रतिदिन रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।