कैथल। लिपिकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से आमजन परेशान हो चुका है। नगर परिषद कार्यालय में लोगों को बिना काम हुए ही वापस लौटना पड़ रहा है। लिपिक वर्ग की हड़ताल के चलते रजिस्ट्रियां होने की संख्या घटकर 50 रह गई है। बीते तीन दिनों में अब तक 200 रजिस्ट्रियां पेंडिंग हैं। इस कारण करीब डेढ़ करोड़ रुपये का राजस्व का नुकसान पिछले तीन दिन में हुआ है।
कार्य करवाने नगर परिषद पहुंचे लोगों का कहना है कि जब तक कर्मचारी हड़ताल पर हैं, तब तक प्रशासन को आमजन की समस्याओं को देखते हुए कोई व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि गांव से शहर पहुंचे लोगों को बिना कार्य करवाए ही खाली हाथ वापस न लौटना पड़े। हड़ताल से हो रही परेशानियों के संदर्भ में ‘अमर उजाला’ की टीम ने शुक्रवार को विभिन्न विभागों में पहुंचकर व्यवस्था पर जांच की। सबसे पहले टीम जब नप कार्यालय पहुंची तो लिपिक वर्ग के कर्मचारियों की कुर्सियां खाली पड़ी थी, लोग अपने कार्य के लिए विभाग में तो पहुंचे, लेकिन कुर्सियों पर कर्मचारियों ने मिलने के कारण बैरंग वापस लौटते दिखाई दिए। नप परिसर में लोगों की भीड़ लगी थी। नगर परिषद में प्रॉपर्टी आईडी, मैरिज सर्टिफिकेट सहित जन्म व प्रमाण पत्र के कार्य प्रभावित दिखे। उधर, लघु सचिवालय में जमीन की रजिस्ट्री पर भी प्रभाव पड़ा है। हड़ताल के कारण रजिस्ट्रियां कम हुई है। सामान्य दिनों से 100 से अधिक रजिस्ट्रियां होती थी, लेकिन अब एक दिन से 50 से 60 रजिस्ट्रियां ही हो पा रही है।
उधर, लिपिक वर्ग के सदस्यों का कहना है कि हड़ताल का शुक्रवार को तीसरा दिन था। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना था कि अब तक सरकार के साथ उनकी कोई बातचीत नहीं हुई। जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मानती या उनसे कोई आश्वासन नहीं देती, तब तक वह हड़ताल को खत्म नहीं करेंगे। इसके अलावा बिजली निगम, शिक्षा विभाग, बिजली निगम सहित अन्य विभागों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए।
लोगों ने बताई परेशानी
गांव सिसला निवासी सलिंद्र ने बताया कि वह नगर परिषद में टैक्स व आयुष्मान कार्ड से संबंधित काम के लिए आया था, लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल के चलते काम नहीं हुआ। सरकार को जब तक हड़ताल खत्म नहीं होती, तब तक काम की व्यवस्था बनाई चाहिए। ताकि गांव से आने वाले लोगों को परेशानी न हो।
कैथल निवासी रमेश ने कहा कि वह किसी काम के लिए नगर परिषद में आया था, लेकिन यहां पर कर्मचारी नहीं मिले। अब उसे वापस जाना पड़ रहा है। सभी लिपिक वर्ग के सदस्य हड़ताल पर है। इससे आमजन को कार्य करवाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिम्मेवार कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जो दूसरे कर्मचारी वह जिम्मेवारी लेने से पल्ला झाड़ रहे हैं।
अपनी बात ...
जिला प्रधान राजेंद्र ढुल ने कहा कि वह एक साल से वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कई बार सरकार के साथ पदाधिकारियों की बैठक भी हुई, लेकिन सरकार उनकी मांगों को अनदेखा कर रही है। जब तक सरकार लिपिक वर्ग की मांग को पूरा नहीं करती है, तब तक कोई भी लिपिक अपने कार्य पर नहीं जाएगा। सभी कर्मचारी शांतिपूर्वक धरने पर बैठे रहेंगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द उनकी मांग नहीं मानती तो आंदोलन तेज करने का फैसला लिया जा सकता है।
जिला संयोजक मनीष ने कहा कि लिपिक वर्ग का वेतन ग्रुप डी के कर्मचारियों से भी कम है। जबकि कार्य का अतिरिक्त भार रहता है। लिपिक वर्ग को उनके काम के समान वेतन नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि उनकी मांग 19900 से बढ़ाकर 35400 करवाने की है। यदि सरकार जल्द इस मांग को पूरा कर देती है तो वह हड़ताल खत्म करने को तैयार हैं।