आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन का धरना दूसरे दिन भी लघु सचिवालय में जारी रहा। धरने की अध्यक्षता जिला उप प्रधान राजबाला ने की व संचालन शीला ढुंढवा ने किया। राज्य महासचिव शकुंतला ने कहा कि लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं, लेकिन सरकार उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने सरकार से मार्च 2019 से अब तक का केंद्रों का किराया देने, रुका हुआ मानदेय जल्द देने, राशन की सप्लाई समय अनुसार व हर सेंटर तक देने, वर्करों व हेल्परों को मेडिकल भत्ता देने, टीए व डीए देने, सेंटरों में दरी, कुर्सी, मेज, पंखा व पानी कैंपर उपलब्ध करवाने, सेंटरों में सप्लाई किया गया राशन चेक करने व हर माह बैठक कर उनकी समस्याओं का अधिकारियों से समाधान करवाने की मांग की। शकुंतला ने कहा के आठ सितंबर को करनाल रैली में जिले भर से वर्कर्स एवं हेल्पर्स भाग लेंगी। 10 सितंबर को पीओ कार्यालय का घेराव किया जाएगा। इस अवसर पर अंजू, केलो, विमला, भावना, सरोज, पिंकी, उर्मिला, जमीला, शीना, कृष्णा व सुनीता मौजूद थी।
बकाया मानदेय के लिए आशा वर्करों ने दिया धरना
आशा वर्कर्स यूनियन का मांगों को लेकर नागरिक अस्पताल के बाहर धरना जारी रहा। शनिवार को धरने पर कलायत ब्लॉक की आशा वर्कर्स इकट्ठी हुई और मांगों को लेकर नारेबाजी की। ब्लॉक प्रधान प्रवेश ने धरने की अध्यक्षता की व संचालन संतोष ढुंढवा ने किया। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि न तो उन्हें महिलाओं की चिंता है और न ही लोगों के स्वास्थ्य की। आशा वर्कर्स के साथ हुए समझौता को सरकार लागू नहीं कर रही। उनका मानदेय सरकार के पास बकाया पड़ा है। उन्होंने मांग की कि मार्च 2019 से स्टेट की बकाया राशि उनके खातों में डाली जाए। इस अवसर पर रीना, रानो, प्रवेश, संतोष व कृष्णा मौजूद थी।