मांगों का ज्ञापन बीडीपीओ को सौंपते मनरेगा मजदूर
कलायत। उपमंडल के रामगढ़ गांव में क्रांतिकारी मनरेगा मजदूर यूनियन के बैनर तले वीबी-ग्रामजी कानून के विरोध में प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान 1 जुलाई से लागू वीबी-ग्रामजी कानून की प्रतियां जलाकर विरोध किया। यूनियन ने पूरे वर्ष रोजगार की कानूनी गारंटी देने और वीबी-ग्रामजी योजना को रद्द करने की मांग उठाई।
यूनियन की ओर से कलायत की बीडीपीओ रितु कुमारी को मजदूरों की मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा गया। यूनियन सदस्य अजय ने कहा कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण गरीबों के अधिकारों से जुड़े लगभग दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर उसकी जगह विकसित भारत-गारंटी रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) लागू कर दिया है।
उनके अनुसार यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है बल्कि ग्रामीण मजदूरों के काम के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश है। रामगढ़ की मनरेगा मजदूर उर्मिला, संतोष और कमलेश ने बताया कि नए कानून के अनुसार खेती के मौसम में 60 दिनों तक काम बंद रहने से परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है पहले ही मनरेगा के तहत बहुत कम काम मिलता था। यदि अब 60 दिनों तक भी काम नहीं मिलेगा तो बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा।
महंगाई लगातार बढ़ रही है और गैस सिलिंडर भी महंगा हो चुका है। ऐसे में हमें वीबी-ग्रामजी नहीं बल्कि मनरेगा चाहिए। अनिल मेट सिमला गांव ने बताया कि आज पूरे देश में भगत सिंह जन अधिकार यात्रा शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और महंगाई पर लगाम लगाने के मुद्दों को लेकर जन अभियान चला रही है।
यात्रा भी मनरेगा मजदूरों की मांगों का समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मनरेगा कानून भी अपने आप में अधूरा है क्योंकि यह केवल 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देता है जबकि वास्तविक आवश्यकता वर्ष के सभी 365 दिनों के लिए कानूनी रूप से सुनिश्चित, सम्मानजनक और स्थायी रोजगार की है।
मांगों का ज्ञापन बीडीपीओ को सौंपते मनरेगा मजदूर