संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। क्रांतिकारी मनरेगा मजदूर यूनियन के नेतृत्व में कलायत ब्लॉक के बीडीपीओ कार्यालय पर मनरेगा खत्म करने और मजदूरों के अधिकारों पर हमला करने के आरोप में जोरदार प्रदर्शन हुआ। मजदूरों ने नए विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन विधेयक, 2025 की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया। यूनियन ने केंद्रीय कृषि मंत्री के नाम ज्ञापन बीडीपीओ रितु को सौंपा।
यूनियन के प्रभारी अजय आशु ने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूर विरोधी कदम उठाते हुए लोकसभा में यह नया विधेयक पेश किया है। पिछले महीनों में लागू हुई श्रम संहिताओं ने औद्योगिक मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकारों को कमजोर किया। अब ग्रामीण मजदूरों के सबसे बुनियादी अधिकार काम की कानूनी गारंटी को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विधेयक में योजनाओं के जरिए अधिकार आधारित कानून को बजट-निर्भर योजना में बदलने की साजिश है, जिससे सरकार की कानूनी जवाबदेही समाप्त हो जाएगी। प्रदर्शन में मेट अनिल, बलकार, धर्मवीर, लाभ और बिरज लाल ने कहा कि मनरेगा पहले ही अधूरा कानून है और 100 दिन के रोजगार तक सीमित है। नया विधेयक 125 दिन का रोजगार देने का दावा करता है, लेकिन पिछले पांच वर्षों में औसतन मजदूरों को केवल 50 दिन का ही काम मिला है। विधेयक को वापस लेने की मांग की गई।