संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मधुमक्खी पालकों के लिए राहत भरी खबर है। हरियाणा सरकार ने भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत शहद का संरक्षित मूल्य 120 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित कर दिया है। इस निर्णय से शहद उत्पादकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सकेगा और उनकी आय में स्थिरता आएगी। सरकार की इस पहल को मधुमक्खी पालकों के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि कैथल जिले में सैकड़ों किसान मधुमक्खी पालन से जुड़े हुए हैं, लेकिन बाजार में शहद के दामों में उतार-चढ़ाव के कारण उन्हें कई बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। अब इस योजना के लागू होने से मधुमक्खी पालक अपने उत्पादन लागत की भरपाई कर सकेंगे और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
योजना का लाभ लेने के लिए सभी मधुमक्खी पालकों को मधुक्रांति पोर्टल तथा भावांतर भरपाई योजना पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
मधुमक्खी पालकों का भौतिक सत्यापन हरियाणा प्रदेश की सीमा के भीतर ही किया जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण करने की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की गई है।
सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक मधुमक्खी बक्से पर परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के अंतिम चार अंक तथा बक्सा नंबर स्पष्ट रूप से अंकित करना अनिवार्य होगा, ताकि सत्यापन और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
उपायुक्त अपराजिता ने कहा कि राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं हनी मिशन के माध्यम से भारत शहद निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना रहा है। हरियाणा सरकार की यह योजना राज्य में शहद उत्पादन को नए आयाम देगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मधुमक्खी पालकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखना है।
जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, ताकि पूरी योजना में पारदर्शिता बनी रहे।
योजना की जानकारी के लिए यहां करें संपर्क
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. हीरा लाल ने बताया कि इच्छुक किसान एवं मधुमक्खी पालक किसी भी प्रकार की सहायता या विस्तृत जानकारी के लिए जिला बागवानी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त टोल फ्री नंबर 1800-180-2021 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने सभी पात्र मधुमक्खी पालकों से अपील की कि वे समय रहते अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें, ताकि योजना का लाभ सीधे उनके बैंक खातों तक पहुंच सके।