11-कैथल। पुराना अस्पताल परिसर।
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कैथल। सरकार की तरफ से पुराना अस्पताल में बनाए जाने वाले चाइल्ड केयर अस्पताल के लिए पुराने जर्जर भवन को गिराने का प्रस्ताव पास हो गया है। अब जल्द ही यहां पड़े पुराने अस्पताल भवन को खत्म करके चाइल्ड केयर अस्पताल बनाने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जगी है। इस समय चाइल्ड केयर यूनिट जिला अस्पताल में चल रही है। बच्चों को दाखिल करने के लिए अतिरिक्त जगह मिलेगी।
गौरतलब है कि इमारत गिराने के लिए करीब तीन महीने पहले ही सिविल सर्जन की तरफ से स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक के पास पत्र भेजकर अनुमति मांगी थी। अब दो दिन पहले ही हुई पंचकूला में हुई बैठक में महानिदेशक ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कागजी कार्रवाई की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इमारत गिराने का कार्य शुरू किया जाएगा। पुराने अस्पताल का भवन इस समय पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। वहीं, इस भवन में स्वास्थ्य विभाग का वेयर हाउस, शहरी स्वास्थ्य केंद्र व प्रसूति केंद्र चल रहा है। यहां पर इस समय सिविल सर्जन कार्यालय बनाया गया है।
इस समय जिला नागरिक अस्पताल 200 बेड का है। इसके अलावा कोरोना महामारी को देखते हुए 100 बेड का पोर्टेबल अस्पताल भी बनाया गया है। चाइल्ड केयर अस्पताल बनने के शहर में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के तहत कुल 400 बेड के अस्पताल बन जाएंगे। यही नहीं इस अस्पताल के साथ-साथ यहां सिविल व डिप्टी सिविल सर्जन कार्यालय व क्वार्टर, आठ डिप्टी सिविल सर्जन के क्वार्टर भी बनाए जाएंगे।
इस समय स्वास्थ्य विभाग में बच्चों के के लिए मात्र एक ही चिकित्सक है, जो प्रतिदिन 100 से 120 बच्चों की जांच करते हैं। चाइल्ड केयर अस्पताल के निर्माण के बाद यहां पर निक्कू वार्ड अलग से बनाया जाएगा। इसके साथ ही रोहतक व चंडीगढ़ पीजीआई में बच्चों के किए गए इलाज के बराबर ही यहां पर सुविधाएं मिलेंगी। यहां पर अगले से बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी नियुक्ति होगी। इसके बाद बच्चों की हर प्रकार की बीमारियों का इलाज शहर के सरकारी अस्पताल में ही मिल चुकेगा। इसके लिए लोगों को न तो निजी अस्पतालों में अधिक खर्च वहन करना पड़ेगा। दूसरा रोहतक या चंडीगढ़ पीजीआई जाने की भी कोई जरूरत नहीं होगी।
स्वास्थ्य विभाग के भवन विंग के जिला नोडल अधिकारी डॉक्टर विकास धवन ने बताया कि पुराना सरकारी अस्पताल के भवन में चाइल्ड केयर अस्पताल बनाने की योजना के तहत काफी समय कार्य चल रहा है। इस कार्य के तहत महानिदेशक से जर्जर भवन गिराने की अनुमति मांगी गई थी। यह अनुमति अब मिल चुकी है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद इस पर विधिवत रूप से कार्य शुरू किया जाएगा।