संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आयुष्मान योजना के तहत भुगतान न होने की स्थिति में राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर जिले में भी शनिवार से योजना के तहत लाभार्थियों का इलाज बंद कर दिया गया। इलाज बंद करने के बाद निजी अस्पताल में पहुंचे मरीजों को काफी परेशानियाें का सामना करना पड़ा।
गौरतलब है कि इस समय जिले में 12 से अधिक निजी अस्पताल में योजना के पैनल पर हैं। इन अस्पतालों में प्रतिदिन दो से तीन ऑपरेशन भी योजना के लाभार्थियों की ओर से करवाएं जाते हैं। ऐसे में शनिवार को निजी अस्पतालों में पहुंचे इन लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्हें इलाज के बिना ही वापस लौटना पड़ा। दरअसल, निजी डॉक्टरों ने बिल में भारी कटौती, देरी से भुगतान, नई योजनाओं का कार्यान्वयन न होना, डॉक्टर्स से परामर्श किए बिना चिरायु और चिरायु विस्तार को शामिल करना जैसी कई समस्याएं बताई हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में आयुष्मान योजना के छह लाख 12 हजार 360 लाभार्थी हैं। इनमें से पांच लाख 41 हजार 459 लाभार्थियों ने अपने कार्ड बनवाएं हैं। जबकि एक लाख लोगों के लाभार्थियों ने इस योजना के तहत अब तक लाभ लिया है।
दवा तक नहीं मिली
दो महीने पहले ही सड़क दुर्घटना हुई थी। इसके बाद टांग में फ्रेक्चर आ गया था। डॉक्टरों ने टांग का ऑपरेशन भी कर दिया था। इसके बाद शनिवार को दवा लेने के लिए अस्पताल में पहुंचा था। आयुष्मान योजना के तहत इलाज चल रहा है तो दवा लेने आया था, लेकिन डॉक्टर ने चैकअप तक नहीं किया। ऐसे में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। - बहादुर सिंह, शहरवासी, कैथल।
नहीं हुआ ऑपरेशन
आयुष्मान योजना का लाभार्थी हूं। बाजू की हड्डी टूट गई थी। इसके बाद डॉक्टर ने इसका ऑपरेशन बताया था, लेकिन आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद करने की स्थिति में डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से भी मना कर दिया है। अब निजी चिकित्सकों की ओर से इस योजना के तहत इलाज शुरू किए जाने का इंतजार करना पड़ेगा। नहीं तो बिना योजना के तहत ही ऑपरेशन करवाना पड़ेगा। - रोहित, शहरवासी, कैथल।
राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर जिले भी भी आयुष्मान योजना के पैनल के निजी अस्पतालों ने शनिवार से आयुष्मान योजनरा के लाभार्थियों को इलाज देना बंद कर दिया है। इसके साथ ही इस योजना के तहत लाभार्थियों के ऑपरेशन भी बंद कर दिए गए हैं। क्योंकि सरकार की ओर से 300 करोड़ रुपये से अधिक की लंबित राशि निजी अस्पतालों को नहीं दी गई है। अब निजी अस्पताल राज्य कार्यकारिणी के फैसले के अनुसार ही इलाज देने पर कुछ आगामी निर्णय लेंगे।
- बी.बी. कक्कड़, जिला प्रधान, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन।