संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की अनाज मंडियों में गेहूं की आवक जोरों पर है, लेकिन उठान धीमा होने से परेशानी लगातार बढ़ रही है। एक तरफ जहां अब उठान की समस्या बनी थी तो अब बारदाना की भी कमी आने से दिक्कतें हो रही हैं।
शहर की तीनों मंडियां अब गेहूं की फसल से अट चुकी हैं। इनमें करीब नौ लाख क्विंटल गेहूं की आवक हो चुकी है और इसमें महज एक लाख क्विंटल गेहूं की उठान हो सकी है। ऐसे हालातों में किसानों और आढ़तियों में रोष बढ़ रहा है।
वीरवार से मंडियों में बारदाना की भी कमी होने लगी है। आढ़तियों ने संबंधित खरीद एजेंसियों पर बारदाना न देने का आरोप लगाया है। इस समय तीनों मंडियों में 10 हजार से अधिक बारदाना की जरूरत है, लेकिन अभी तक केवल सात हजार बैग बारदाना के मंडियों में आए हैं।
जिला आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान अश्वनी शोरेवाला ने कहा कि एक तरफ तो मार्केट कमेटी की ओर से सड़क पर धान गिराने पर आढ़तियों को नोटिस दिया जाता है जबकि दूसरी तरफ उठान ही नहीं किया जाता है। अब तो बारदाना न होने से तौल का काम भी प्रभावित होता है।
शोरेवाला ने कहा कि सरकार एजेंसियों को 2426 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं दे रही है जबकि आढ़तियों को 2635 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं दी जाती है। यह अन्याय है। कहा कि मंडियों में गेहूं की फसल का नियमित रुप से उठान न होने से किसानों व आढ़तियों का रोष लगातार बढ़ रहा है।
उधर, नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि आढ़तियों की मांग है कि गेहूं के उठान कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि मंडियों में किसानों को अपनी फसल डालने के लिए जगह मिल सके। उठान में देरी होने पर यदि गेहूं की बोरियां का वजन कम होता है तो उस घटती का आढ़ती जिम्मेवार है। इतनी तो आढ़ती को आढ़त भी नहीं मिलती, जितना उसका गेहूं का वजन कम होने पर नुकसान हो जाता है।
इस संबंध में हैफेड के जिला प्रबंधन अनूप नैन ने बताया कि मंडियों में बारदाना की कोई कमी नहीं है। मंडियों में उनकी एजेंसी की ओर से पहले ही पर्याप्त संख्या में बारदाना दिया गया है।