संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। विद्यार्थियों के बाद अब बुजुर्गों को मिलने वाली आधी किराया छूट भी निजी बसों में पूरी तरह बंद कर दी गई है। जिलेभर के कई मार्गों पर निजी बस संचालक बुजुर्ग यात्रियों से पूरा किराया वसूल कर रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है। गांव से शहर तक आने-जाने वाले बुजुर्गों को जहां अब अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं सरकारी बसों का घंटों इंतजार करना भी उनकी मजबूरी बन गया है।
रोडवेज विभाग द्वारा जिले के दर्जनभर रूटों पर रोडवेज और निजी बसों का समय तय किया गया है, जिसमें आमतौर पर एक बस सरकारी और अगली निजी होती है। बुजुर्ग केवल रोडवेज बस में ही आधे किराये की सुविधा ले पा रहे हैं, ऐसे में वे स्टॉप पर लंबे समय तक खड़े रहकर रोडवेज बस का इंतजार करते हैं। इससे उनका समय भी नष्ट हो रहा है और उन्हें शारीरिक थकावट का भी सामना करना पड़ रहा है। जब रोडवेज की बस स्टॉप पर पहुंचती है तो यात्री एकदम से भीड़ के रूप में बस पर टूट पड़ते हैं। इस अफरा-तफरी में बुजुर्गों को धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ता है और कई बार खड़े होकर असुरक्षित सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कई बार अधिक भीड़ होने के कारण बुजुर्ग बस में चढ़ भी नहीं पाते और घंटों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
निजी बस संचालकों द्वारा आधे किराए की छूट से मना किए जाने के कारण कई बुजुर्ग मजबूरी में पूरा किराया देकर यात्रा कर रहे हैं। इससे बुजुर्गों में गहरा रोष व्याप्त है। जिन रूटों पर केवल निजी बसों का ही संचालन है, वहां स्थिति और अधिक गंभीर बनी हुई है।
नाराज बुजुर्गों ने सरकार से मांग की है कि उनके आधा किराया छूट वाले कार्ड निजी बसों में भी मान्य किए जाएं, ताकि उन्हें राहत मिल सके और सरकारी योजना का लाभ वास्तविक रूप से मिल सके।
जिले में बने 15 हजार से अधिक कार्ड
जिले में बुजुर्गों के लिए सरकार की ओर से लगभग 15 हजार आधा किराया छूट वाले कार्ड बनाए जा चुके हैं। कैथल से चीका, असंध, नंगूरा, टोहाना, निसिंग, पूंडरी से कुरुक्षेत्र, राजौंद से पिहोवा, ढांड से करनाल और खरका से पिहोवा जैसे रूटों पर निजी बसों का संचालन हो रहा है। डिपो से करीब 120 निजी बसें और रोडवेज व लीज की लगभग 197 बसें संचालित हैं। बुजुर्गों के लिए आधा किराया कार्ड योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में की गई थी, तब से यह सुविधा रोडवेज और निजी बसों में मान्य थी।
अदालत में मामला विचाराधीन ः यूनियन
निजी बस यूनियन के प्रधान हरबंस ने बताया कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है। अदालत के फैसले के अनुसार ही आगे नियमों का पालन किया जाएगा। फिलहाल निजी बसों में बुजुर्गों को आधे किराये की छूट नहीं दी जा रही है।
बुजुर्गों की पीड़ा
बुजुर्ग यात्रियों शमशेर, किताब सिंह और मनफूल ने बताया कि पहले अटल सेवा केंद्र जाकर कार्ड बनवाना पड़ता है, फिर बस अड्डों के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके बावजूद निजी बसों में कार्ड मान्य नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि वे आरटीए को भी इस समस्या की शिकायत कर चुके हैं और मांग की है कि निजी बसों में भी यह सुविधा लागू की जाए, ताकि वे समय पर अपने काम पूरे कर सकें और सुरक्षित यात्रा कर सकें।
आधा किराया के मुद्दे को लेकर निजी बस यूनियन के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इसका समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। मामला अदालत में भी विचाराधीन है।
-आरटीए गिरिश कुमार