संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। क्षेत्र में तालाबों को संवारने योजना पूरी तरह से दम तोड़ रही है। तालाबों के पानी को अमृत के सामान बनाना तो दूर की बात गंदे पानी की निकासी करने में ही पंचायती राज विभाग विफल साबित हो रहा है। माॅडल गांव बालू में बदहाल स्थिति में पहुंचे तालाब का पानी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल तक पहुंच चुका है।
हालांकि इस स्कूल के नए भवन और अन्य सुविधाओं के लिए स्कूली बच्चों ने कुछ वर्ष पहले पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़ी थी। यह देश का ऐसा पहला मामला रहा जिसमें स्कूली बच्चों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उनकी कुशलता से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप रापडि़या ने की थी।
लंबे समय तक न्यायालय में चले इस मामले में बच्चों की जीत हुई थी और लाखों रुपये का बजट सरकार को न्यायालय के आदेश पर स्कूल मेंं सुविधाएं जुटाने के लिए खर्च करना पड़ा था। अब फिर से यह स्कूल भवन खतरे में है। क्योंकि स्कूल व अन्य निर्माण इस तालाब के गंदे पानी की चपेट में हैं। जिस प्रकार तालाब मेंं जल स्तर बढ़ रहा है और निकासी की कोई व्यवस्था नहीं बन पा रही उसके परिणाम चिंता जनक हो सकते हैं। क्योंकि न केवल गंदा पानी इधर-उधर हिलोरे मार रहा है बल्कि हादसे की आशंका बनी रहती है।
गौरतलब है कि बालू को वर्ष 2006 में आदर्श गांव का दर्जा दिया गया था। इसके तहत करोड़ों रुपये विभिन्न विकास कार्यों के लिए जारी हुए लेकिन जिस प्रकार बिना बरसात पानी निकासी व्यवस्था यहां चौपट रहती है वह गंभीर मुद्दा है। जबकि बारिश के दिनों में स्थिति खराब हो जाती समस्या से लोग लंबे समय से जूझ रहे हैं और समाधान के नाम पर केवल आश्वासन है।
जिला परिषद सदस्य दीप बालू ने कहा कि तालाबोंं को कायाकल्प की बेहद दरकार है। हालात इस कदर खराब हैं कि न तो इनमें स्वच्छ जल भराव की कोई व्यवस्था है और न निकासी का कोई प्रबंध। तालाब सुंदरीकरण की योजनाएं धरातल पर नजर नहीं आ रही। इसलिए उन्होंने इस मुद्दे को मुख्य रूप से जिला परिषद के साथ-साथ अन्य पटलों पर उठाया है।