हरियाणा में पूंडरी एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां कोई राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि व्यक्ति प्रधान है। लगातार छह विधानसभा चुनाव से यहां निर्दलीय प्रत्याशी ही जीत रहा है। यही नहीं यहां का जनप्रतिनिधि हमेशा सत्ता में ही रहा है यानि विपक्ष में नहीं बैठा है। 1996 से लेकर 2019 तक यह रिकार्ड बरकरार है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि पूंडरी की जनता किसी पार्टी के टिकट की मोहताज नहीं है, बल्कि पार्टी से ऊपर उठकर वह अपना जनप्रतिनिधि स्वयं चुनती है।
पूंडरी हलका व हलके की जनता पूरे प्रदेश में एक बात के लिए मशहूर हैं और वो है आजादी। वैसे तो आजादी शब्द जहन में आते ही गर्व महसूस होता है और अंदाजा लगाया जाता है कि किसी गुलामी से आजादी मिली हो, लेकिन यहां पूंडरी में आजाद या आजादी का अर्थ कुछ अलग मायनों से है। पूंडरी हलका पिछले छह चुनावों से प्रदेश को किसी भी पार्टी की लीक से हटकर आजाद विधायक देता आ रहा है।
कमाल व हैरान करने वाली बात तो यह है कि पूंडरी से 1996 से आजाद विधायक जीतता आया है और आजाद होते हुए सत्ता पक्ष के उम्मीदवार को हराकर सत्ता पक्ष के खेमे में बैठता रहा है।
1996 में आजाद प्रत्याशी नरेंद्र शर्मा जीते, 2000 में तेजवीर सिंह आजाद जीते, 2005 में प्रो. दिनेश कौशिक आजाद जीते, 2009 में सुलतान जड़ौला आजाद जीते, 2014 में दिनेश कौशिक जीते तथा 2019 के चुनाव में भी रणधीर गोलन आजाद प्रत्याशी ही जीते। वर्ष 2005 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की लहर में दिनेश कौशिक जीत कर कांग्रेस के साथ विधान सभा में बैठे और वर्ष 2014 में पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर चली हुई थी बावजूद उसके पूंडरी की जनता भाजपा के प्रत्याशी को नहीं बल्कि आजाद प्रत्याशी दिनेश कौशिक को ही चुना।
टिकट मिला तो हार गये, निर्दलीय लड़े तो जीत गये
सोचने वाली बात यह है कि 2014 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर तथा रोड बिरादरी की अधिक वोट होने के बाद भी रणधीर सिंह गोलन चुनाव हार गए थे। पूंडरी की जनता का फैसला देखिए 2019 के चुनाव में उन्हीं रणधीर गोलन को टिकट कटने के बाद आजाद प्रत्याशी के तौर पर रिकार्ड जीत दर्ज करवा कर विधान सभा में भेजा। भले ही रणधीर गोलन निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीते हों, लेकिन विधान सभा में भाजपा के खेमे में ही बैठेंगे। पूंडरी शहर का विधायक भी पहली बार ही बना है। इससे पूर्व कभी पूंडरी शहर का निवासी पूंडरी का विधायक नहीं बना।