कैथल। इस चुनाव में गांव और शहर की गलियों, मोहल्लों का माहौल बदला सा नजर आ रहा है। यहां सक्रिय रहने वाले ठुलेदारों की पूछ नहीं है। इसीलिए नहीं है कि पिछले कुछ साल से कंप्यूटर का महत्व बढ़ गया है। ऐसे लोग चुनाव में वोटों का ठेका लेते थे। बाद में नौकरियां लगवाने व तबादले करवाने के ठेके लेकर जिला मुख्यालयों से लेकर चंडीगढ़ प्रदेश मुख्यालयों तक खूब पूछ होती थी। लेकिन इस बार कंप्यूटर ने इन लोगों के सफेद - कुर्ते और पाजामा की ठसक को ढीला कर दिया है। एक तरह से इन लोगों की चौधर कंप्यूटर में सिमट कर रह गई है। जिसकी एक क्लिक से अधिकतर काम होने शुरू हो गए हैं।
किसी कर्मचारी को तबादला करवाना हो तो उस लीडर को लेकर नेताजी या फिर किसी अधिकारी की जी- हुजूरी, कुछ हजार रुपये खर्च करने जैसे रिवाज था। यही स्थिति रोजगार को लेकर रहती थी। ये मौजिज व्यक्ति गांव के कुछ ओर लोगों को लेकर नेताओं के पास जाकर बैठते थे और उनसे रोजगार की हां करवाकर लाते थे। जब रोजगार मिल जाता था तो इनकी उस क्षेत्र में रुतबा और रुआब बढ़ जाता था। बस फिर हर बार, हर काम के लिए इन्हीं की पूछ रहती थी। नेताजी भी इन्हीं कुछेक लोगों को हर समय भाव देते थे।